कोविड़ नियमो को ध्यान में रखते हुए वट-सावित्री ब्रत संपन्न
रामप्रवेश चौधरी (संवाददाता)
राजगांगपुर : वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए कोविड नियमो का पालन कर बट सावित्री पूजा संपन्न!
सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर तथा इसके आस पास के क्षेत्रो में सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत कोरोना वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए कुछ महिलाएं वट वृक्ष के पास तो कुछ महिलाएं अपने अपने घरों में ही अपने पति की लम्बी आयु के लिए वट सावित्री की पूजा अर्चना करते हुए देखे गए।
वट सावित्री का व्रत प्रत्येक बर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को पालन किया जाता है। यह व्रत बिहार,बंगाल,उड़िशा समेत देश के अन्य प्रदेशों में भी पालन किया जाता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं विधि विधान के साथ वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना करती हैं।
इस ब्रत को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को भी विवश कर दिया था। इस दिन सत्यवान-सावित्री कथा को भी पढ़ा या सुना जाता है।
इस व्रत को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन अपने मृत पति को पुन: जीवित करने के लिए सावित्री ने यमराज से याचना की थी जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें उनके पति सत्यवान के प्राण लौटा दिए थे। इसी के साथ यमराज ने सावित्री को तीन वरदान भी दिए थे। इन्हीं वरदान को मांगते हुए सावित्री ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर अपने पति को जीवित करवा दिया था। बताया जाता है कि यम देवता ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में वापस लौटाए थे। सावित्री ने इस चने को ही अपने पति के मुंह में रख दिया था जिससे सत्यवान फिर से जीवित हो उठे थे। यही वजह है कि इस ब्रत में चने का विशेष महत्व माना गया है।





