करोड़ों की जमा राशि पर संकट

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करोड़ों की जमा राशि पर संकट

करोड़ों की जमा राशि पर संकट! गेरदा पोस्ट ऑफिस के खाताधारकों ने उठाए गंभीर सवाल पासबुक में लाखों की जमा राशि, पोस्ट ऑफिस के रिकॉर्ड में खाता खाली होने का आरोप; डीसी से शिकायत के बाद जांच शुरू।स्थानीय विधायक ने भी दिया न्याय का भरोसा। 
सिमडेगा। बानो थाना क्षेत्र के गेरदा गांव स्थित पोस्ट ऑफिस में खाताधारकों की जमा राशि को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पासबुक में वर्षों से लाखों रुपये की जमा राशि दर्ज है, लेकिन पोस्ट ऑफिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में वही राशि दिखाई नहीं दे रही है। मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने उपायुक्त (डीसी) से शिकायत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वही स्थानीय विधायक ने भी लोगों  को न्याय का आश्वासन दिया है। 
ग्रामीणों के अनुसार, गेरदा पोस्ट ऑफिस में तत्कालीन पोस्टमास्टर आबिद मियां के कार्यकाल के दौरान लोगों से बड़ी संख्या में राशि जमा कराई जाती थी। खाताधारकों को उनकी पासबुक में जमा रकम की बाकायदा प्रविष्टि भी की जाती थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा था कि उनकी मेहनत की कमाई सरकारी डाक विभाग के खाते में सुरक्षित है।
मामला तब सामने आया जब कुछ खाताधारक अपनी जमा राशि निकालने पोस्ट ऑफिस पहुंचे। बताया गया कि पासबुक में रकम दर्ज होने के बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में राशि नहीं मिली। इसके बाद एक-एक कर अन्य ग्रामीण भी अपनी पासबुक लेकर जांच कराने पहुंचे। देखते ही देखते बड़ी संख्या में खाताधारक इस शिकायत के साथ सामने आ गए।
ग्रामीणों का दावा है कि कई खातों में लाखों रुपये जमा हैं और पूरे मामले में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की आशंका है। हालांकि, वास्तविक राशि कितनी है और कितने खाताधारक प्रभावित हैं, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। 
ग्रामीणों ने उपायुक्त से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। जांच में पोस्ट ऑफिस के रिकॉर्ड, खातों की प्रविष्टियां, पासबुक और जमा राशि से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
मामले में ग्रामीणों ने तत्कालीन पोस्टमास्टर की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान बड़ी रकम जमा हुई थी और अब उनकी संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल उन ग्रामीणों की जमा-पूंजी को लेकर है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से पैसा बचाकर पोस्ट ऑफिस में जमा किया था। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी का मामला नहीं होगा, बल्कि ग्रामीणों के सरकारी व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा गंभीर सवाल भी होगा।
अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर है। क्या पासबुक में दर्ज लाखों रुपये वास्तव में विभागीय रिकॉर्ड से गायब हैं? कितनी राशि प्रभावित है? जिम्मेदार कौन है? और खाताधारकों की जमा पूंजी वापस कैसे मिलेगी? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
नोट: उपरोक्त खबर में लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोपों को शिकायत/ग्रामीणों के दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।