एनआईटी राउरकेला में सतत शहरी विकास पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

एनआईटी राउरकेला में सतत शहरी विकास पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
एनआईटी राउरकेला में सतत शहरी विकास पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सतत शहरी विकास सम्मेलन (आईसीएसयूडी-2026) का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 7 से 9 जुलाई तक आयोजित इस सम्मेलन में भारत और विदेशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शहरी योजनाकारों तथा उद्योग विशेषज्ञों ने सतत, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहरों के निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन मंथन किया। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से एनआईटी राउरकेला के सिविल इंजीनियरिंग, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान, पृथ्वी एवं वायुमंडलीय विज्ञान तथा योजना एवं वास्तुकला विभाग ने हाइब्रिड मोड में आयोजन किया। उद्घाटन सत्र ऑफलाइन जबकि सभी तकनीकी सत्र ऑनलाइन आयोजित किए गए।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने की। मुख्य अतिथि क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (इंडिया कैंपस), गांधीनगर के डीन प्रो. एम. सतीश कुमार ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और सार्वजनिक नीति के समन्वय से ही आधुनिक शहरी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है तथा भारत विश्व को नैतिक नेतृत्व देने की क्षमता रखता है।

प्रो. उमामहेश्वर राव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सतत विकास केवल आधारभूत संरचना और तकनीक का विषय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, जवाबदेही और दूरदर्शी निर्णयों से जुड़ा है। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सभी विभागों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. के.के. खटुआ ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, आधारभूत संरचना विकास और संसाधन प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।

सम्मेलन के संयोजक प्रो. जलंधर प्रधान ने बताया कि सम्मेलन के लिए 450 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए थे। कठोर सहकर्मी समीक्षा के बाद लगभग 200 शोध-पत्रों का चयन किया गया, जिनका प्रस्तुतीकरण 18 तकनीकी सत्रों में किया गया। सम्मेलन में शहरी शासन एवं सामाजिक सततता, शहरी नियोजन, सतत परिवहन, जल एवं पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, शहरी जलवायु, आपदा जोखिम प्रबंधन, लचीली शहरी अवसंरचना तथा स्मार्ट एवं डेटा-आधारित शहरों जैसे सात प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान 10 मुख्य व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी पटना, एनआईटी पटना, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तथा क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (इंडिया कैंपस) के विशेषज्ञों ने सतत शहरी शासन, जलवायु अनुकूलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अवसंरचना, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय स्थिरता और शहरी गतिशीलता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।सम्मेलन में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को 'बेस्ट पेपर प्रेजेंटर अवार्ड' से सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर एनआईटी राउरकेला ने अंतःविषय अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के निष्कर्ष भविष्य में प्रभावी नीति-निर्माण, अकादमिक सहयोग तथा अधिक समावेशी एवं लचीले शहरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।