एक साथ एक ही थाना के 28 पुलिस कर्मी निलंबित

एक साथ एक ही थाना के 28 पुलिस कर्मी निलंबित

बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र में एक साथ 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस कार्रवाई पर झारखंड पुलिस हर संघ ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी और दबाव का परिणाम बताया है।

संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी घटना में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होना जरूरी है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जवानों को निलंबित करना न सिर्फ असंतुलित निर्णय है, बल्कि इससे पुलिस बल का मनोबल भी प्रभावित होता है। उनका मानना है कि इस तरह के फैसले से ईमानदारी से काम कर रहे पुलिसकर्मियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। संघ ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में तबादला - नियुक्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में जिस प्रकार के नियम लागू किए जा रहे हैं, उसका सीधा असर पुलिसकर्मियों के दैनिक कार्यों और उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके। इसके साथ ही संघ ने बोकारो के पुलिस अधीक्षक से इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बिना ठोस कारणों के इतनी बड़ी संख्या में निलंबन किया जाता है, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जनता के बीच उसकी छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है, और सभी की नजरें आगे होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।पुलिस अधीक्षक का कार्यालय 'बोकारो' द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह कहा गया है कि -  

दिनांक 26.7.2025 को रेखा देवी, उम्र करीब 37 वर्ष, पति अनंत महतो ग्राम खुंटाडीह, थाना पिंड्राजोरा, जिला बोकारो द्वारा उनकी पुत्री कुमारी पुष्पा महतो उम्र 18 वर्ष को अज्ञात अभियुक्त द्वारा अपहरण किए जाने का आवेदन दिया गया था उक्त घटित घटना के आलोक में पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 147/25 दिनांक 04.08.2025 धारा-140 (3) बीएनएस के तहत अज्ञात अभियुक्त के विरुद्ध दर्ज किया गया था। गठित एसआईटी टीम के पुलिस पदाधिकारी के द्वारा उक्त कांड के समाधान के दौरान समीक्षोपरांत दिए गए निर्देशों अक्षरशः अनुपालन नहीं किया गया। अनुसंधान के समय अभियोजन पक्ष को कमजोर करते हुए अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य किया गया था। एवं इनका आचरण संदेहात्मक प्रतीत हुआ उक्त आलोक में कांड में त्वरित उद्वभेदन हेतु आलोक रंजन पुरी साहब को अधीक्षक नगर के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जिसके सिर्फ एक दिन में कांड का उद्वभेदन करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया तथा गिरफ्तार अभियुक्त के निशानदेही पर ही अपहृता का शव कंकाल की हड्डी, पहना हुआ कपड़ा एवं हत्या में प्रयुक्त चाकू को बरामद किया गया इससे स्पष्ट हुआ कि पिंण्ड्राजोरा थाना में पदस्थापित/प्रतिनियुक्त सभी पुलिस पदाधिकारी/कर्मी के द्वारा कांड के उद्वेदन में अपेक्षित सहयोग प्रदान नहीं किया गया है तथा थाना का गोपनीयता भी बनाई नहीं रखा गया। साथ  ही अन्य स्रोत से पता चला है कि अभियुक्त को बचाने के उद्देश्य से लाभ पहुंचाने का कार्य करना, पैसे के लेनदेन करना, अभियुक्त के साथ पार्टी किया गया है, जिसके कारण पुलिस की छवि आमजनो में धूमिल हुई है। उक्त आलोक में पिंण्ड्राजोरा थाना में पदस्थापित/प्रतिनियुक्त सभी पुलिस पदाधिकारी/ कर्मी अर्थात आरक्षित से लेकर थाना प्रभारी तक को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित किया जाता है।