आईईआई राउरकेला और आरएसपी ने 59वां इंजीनियर्स दिवस मनाया
सतीश शर्मा (उप संपादक)
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) (आईईआई), राउरकेला लोकल सेंटर और राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार (15 सितंबर) को राउरकेला इस्पात संयंत्र के गोपबंधु ऑडिटोरियम में 59वां इंजीनियर्स दिवस उत्साह और पेशेवर गरिमा के साथ मनाया गया। इस वर्ष समारोह का राष्ट्रीय विषय “सतत एवं तकनीकी रूप से संप्रभु भारत के लिए इंजीनियरिंग उत्कृष्टता” था। कार्यक्रम में देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता, हरित औद्योगिकीकरण और सतत विकास में इंजीनियरिंग समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। इस समारोह में आरएसपी के कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) बी.आर. पलई, मुख्य अतिथि थे। आदित्य एल्युमिनियम, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष एवं यूनिट प्रमुख जगन्नाथ पी. नायक, मुख्य वक्ता और एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रभारी प्रो. प्रदीप सरकार,सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। आईईआई राउरकेला के अध्यक्ष एवं आरएसपी के महाप्रबंधक (प्लेट मिल) दिपांकर महापात्र तथा आईईआई राउरकेला के मानद सचिव हिमांशु सतपथी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया जिनकी जयंती (15 सितंबर) को सारे देश में इंजीनियर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है, को कार्यक्रम की शुरुआत में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मुख्य अतिथि बी.आर. पलई ने अपने संबोधन में इंजीनियरिंग समुदाय के निरंतर उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने इंजीनियरों से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए नवीन और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सतत प्रौद्योगिकी को औद्योगिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाकर भारत को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। मुख्य वक्ता जे.पी. नायक ने तकनीकी संप्रभुता हासिल करने के लिए स्थानीय नवाचार, स्वदेशी तकनीक और उन्नत इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता केवल प्रौद्योगिकी के आयात को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में नई तकनीकों के विकास और उन्हें औद्योगिक स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता विकसित करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रो. प्रदीप सरकार ने अकादमिक अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों में विकसित ज्ञान और तकनीक का प्रभावी औद्योगिक उपयोग देश की प्रगति को नई गति दे सकता है।
इस अवसर पर उत्कृष्ट नेतृत्व एवं संस्थागत सेवाओं के लिए एमिनेंट इंजीनियर अवॉर्ड से आरएसपी के पूर्व महाप्रबंधक ए.के. गोस्वामी तथा आईईआई राउरकेला लोकल सेंटर के पूर्व मानद सचिव एवं एनआईटी राउरकेला के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. शरदिंदु घोष को सम्मानित किया गया। इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए आईईआई राउरकेला के अध्यक्ष दीपंकर महापात्र ने कहा कि आधुनिक इंजीनियरों की जिम्मेदारी केवल औद्योगिक विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। समारोह के दौरान सर एम. विश्वेश्वरैया के जीवन, उनकी उपलब्धियों और देश के औद्योगिक विकास में उनके योगदान पर आधारित एक प्रेरणादायक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति प्रदर्शित की गई। इसके पश्चात आईईआई राउरकेला लोकल सेंटर की स्मारिका का विमोचन किया गया। आईईआई राउरकेला के मानद सचिव हिमांशु सतपथी द्वारा धन्यवाद अर्पण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





