6 अक्टूबर: सिखो के सातवें गुरु गुरु हर राय की पुण्यतिथि
सिखों के सातवें गुरु, श्री गुरु हर राय जी की पुण्यतिथि: शांति, सेवा और करुणा के पुंज को नमन
सिख इतिहास में 6 अक्टूबर का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक है। इसी दिन वर्ष 1661 में सिखों के सातवें गुरु, श्री गुरु हर राय जी पंजाब के कीरतपुर साहिब में ज्योति जोत समा गए थे (उनका निधन हुआ था)। आज देश-विदेश में सिख संगत और श्रद्धालु उन्हें उनकी पुण्यतिथि पर भारी श्रद्धा और सत्कार के साथ याद कर रहे हैं।
गुरु हर राय जी का जन्म 1630 में हुआ था और 1644 में उन्होंने अपने दादा, छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद जी से गुरुगद्दी प्राप्त की थी। उनका 17 वर्ष का गुरु काल मुख्य रूप से शांति, करुणा और सेवा के लिए जाना जाता है। उनके पास 2200 घुड़सवारों की एक मजबूत सेना थी, लेकिन उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी कोई युद्ध नहीं किया। उनका मानना था कि शस्त्र आत्मरक्षा के लिए हैं, आक्रामकता के लिए नहीं।
गुरु हर राय जी का प्रकृति और वन्यजीवों से गहरा लगाव था। उन्होंने कीरतपुर साहिब में एक विशाल आयुर्वेदिक औषधालय (दवाखाना) और वनस्पति उद्यान स्थापित किया था, जहां दुर्लभ जड़ी-बूटियां उगाई जाती थीं। जब मुगल सम्राट शाहजहां का पुत्र दारा शिकोह गंभीर रूप से बीमार पड़ा, तो उसकी जान गुरु जी के औषधालय से भेजी गई दवा से ही बची थी।
ज्योति जोत समाने से पहले, गुरु हर राय जी ने अपने छोटे पुत्र, श्री गुरु हरकिशन जी को सिखों के आठवें गुरु के रूप में नियुक्त किया। आज के समय में गुरु हर राय जी का पर्यावरण संरक्षण, गरीबों की निस्वार्थ सेवा और अहिंसा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।





