सादगी के पीछे छिपा कला का विराट व्यक्तित्व

सादगी के पीछे छिपा कला का विराट व्यक्तित्व

सादगी के पीछे छिपा कला का विराट व्यक्तित्व : पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय पर जयंत थोरात की भावपूर्ण टिप्पणी"

 रायगढ़।  छपूर्व डीआईजी एवं प्रतिष्ठित कवि साहित्यकार जयंत थोरात ने पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण शब्दों में प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार हमारे आसपास रहने वाले साधारण दिखने वाले लोग असाधारण प्रतिभा के धनी होते हैं। वर्षों तक पड़ोसी रहे अनूप रंजन पांडेय की विनम्रता,सहजता और संस्कारों के पीछे लोककला,रंगमंच और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण का एक विराट व्यक्तित्व छिपा था।
जयंत थोरात ने कहा कि बस्तर के विलुप्तप्राय वाद्ययंत्रों और लोककलाओं को पुनर्जीवित करने में पांडेय का योगदान ऐतिहासिक है। उनके प्रयासों से दर्जनों कला समूह पुनः सक्रिय हुए और “बस्तर बैंड” जैसे अभिनव मंच का निर्माण हुआ। वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित पांडेय को अब राष्ट्रीय स्तर पर संगीत एवं रंगकला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी सम्मान हेतु चयनित किया जाना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने इस उपलब्धि पर पांडेय को बधाई देते हुए कहा कि उनकी साधना,शोध और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।