विस्थापित अधिकार मंच ने छेडा़ आरपार का आंदोलन
पश्चिम सिंहभुम जिला के चांडिल अंचल में आज चांडिल डैम के 116 गांव और 84 मौजा के विस्थापितों ने सुवर्णरेखा भवन पर किया अन्दोलन।
प्रदर्शनकरीयों के के नेता विस्थापित अधिकार मंच के नेतृत्वकर्ता राकेश रंजन महतो बोले- मध्यप्रदेश की तरह विस्थापितों को मुआवजा और नौकरी दे सरकार नहीं तो विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले तालाबंदी करने की चेतावनी।
आदित्यपुर के सुवर्णरेखा भवन पर आज बुधवार के दिन विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले चांडिल डैम के 116 गांव और 84 मौजा के विस्थापितों का नेतृत्व कर रहे राकेश रंजन महतो ने कहा कि 116 गाँव, 84 मौजा के विस्थापित परिवारों को मध्यप्रदेश की तरह विस्थापितों को मुआवजा और नौकरी दे सरकार, नहीं तो हमलोग कार्यालय में तालाबंदी करेंगे। इनका कहना था कि अब तक विस्थापितों को केवल आश्वासन देकर सरकार ठगने का काम करती रही है।
विस्विथापितो का कहना है कि स्थापितों को पुनर्वास के नाम पर 12 डिसमिल जमीन और नौकरी के बदले 6.45 लाख रुपये का जो पैकेज दिया जा रहा है वह हम विस्थापितों को मंजूर नहीं है, हमें 2023' 2024 के नवीनतम दर पर मुआवजा दे और प्रत्येक विस्थापित परिवार को नौकरी मिले, नौकरी नहीं देने की स्थिति में मध्यप्रदेश सरकार की तरह 60 लाख रुपये का मुआवजा पैकेज मिले।विस्थापितों ने आज इन मांगों के समर्थन में मुख्य द्वार को अवरूद्ध रखा। विस्थापितो की मुख्य मांग है कि 1981 नीति लागू करो, चांडिल डैम पदाधिकारियों मनमानी करना बंद करो, 12.5 डिसमील नहीं पच्चीस डिसमील चाहिए, पुनर्वास स्थाल को सभी सुविधा देना होगा, चांडिल डैम 116 गाँव 84 मौजा के विस्थापित को अपना हक अधिकार अभी तक सरकार नहीं दिया, और वहां पर रहने वाले लोग बंजारा की तरह बाहर रह रहे है इसी प्रकार सरकार की अगर रवैया रहेगी तो आने वाले समय में इन लोगों के द्वारा बहुत बड़ा कदम उठाया जाएगा जिसका जिम्मेवार सरकार होगा, कार्यालय कर्मी उपद्रवियों की आशंका को देखते हुए मुख्य द्वार को बंद रखा. हालांकि कार्यालय में न तो अपर निदर्शक दिनेश रंजन मौजूद रहे और न ही प्रशासक सह परियोजना के सचिव प्रशांत कुमार ही मौजूद रहे. जिसके वजह से विस्थापितों के साथ किसी प्रकार की वार्ता नहीं हो सकी। विस्थापित शाम करीब 4 बजे तक कार्यालय गेट में जमें रहे, बता दें कि अप्रैल 2023 से ही अर्थ के अभाव में विस्थापितों का सारा कार्य ठप है, इनकी मांग है कि सरकार इस पर ध्यान दें और उनकी मांगों को पूरा करें।





