विश्व चिकित्सक दिवस पर नितिन सिन्हा की बिशेष लेख
प्रति वर्ष 1 जुलाई को पूरे भारत देश में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यह दिन उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए विशेष होता है, जो तमाम प्राकृतिक और अप्राकृतिक आपदाओं से लेकर महामारी और बीमारियों में अपनी जान की परवाह किए बगैर 24*7 लोगों की सेवा में लगे रहते हैं।
वैसे यह दिन देश के तत्कालीन प्रख्यात डॉक्टर,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि को ध्यान में रखकर मनाया जाता है।
दरअसल, महाविभूति डॉ. रॉय का जन्म 1 जुलाई, 1882 को हुआ था। इसी तारीख को 1962 में 80 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था।
उन्होंने भारतीय चिकित्सा परिषद और भारतीय चिकित्सा संघ की स्थापना में महत्वपूर्ण सबसे भूमिका निभाई थी। देश और मानव सेवा के प्रति उनके त्याग और समर्पण भाव को ध्यान में रखकर तथा देशभर के चिक्तिसकों को सम्मानित करने के उद्देश्य से 1 जुलाई 1991 को भारत में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पहली बार डॉक्टर्स डे मनाया था।
तब से यह परंपरा चली आ रही है कि देश मे हर साल 1 जुलाई के दिन डॉक्टर्स डे के रूप मनाया जाता है।
कोविड महामारी के दौर में हमारे देश के सेवाभावी डॉक्टरों ने अपनी निरंतर सेवा से यह सिद्ध किया कि-
*अक्सर ईश्वर सबके जीवन की रक्षा खुद से नहीं कर पाते इसलिए इस धरती पर उन्होने अपने रूप में डॉक्टरों को भेज दिया है।"*
चंद पंक्तियों के साथ:-
"दवाएं बीमारियों का इलाज करती हैं, लेकिन मरीजों को सिर्फ डाक्टर ही ठीक कर सकते हैं।" - कार्ल जंग
"दूसरों के लिए जिया जाने वाला जीवन ही सार्थक जीवन है,और ऐसा जीवन डॉक्टरों का है" - अल्बर्ट आइंस्टीन
"डॉक्टर्स का पेशा ही एकमात्र ऐसा पेशा है जो खुद को खत्म करने के लिए लगातार काम करता है।" - मार्टिन एच फिशर





