विपत्तियों से भरी साउथबलंडा की सड़कें
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
तालचेर ओड़िशा के तालचेर क्षेत्र से काफी राजस्व जाता है, पर यह क्षेत्र की स्थिति अब दीप तले अंधेरा जैसा हैं। इस क्षेत्र के राहगीरो और लोगों को रास्ते पर चलने के लिए बराबर परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बार-बार स्थानीय प्रशासन से इसकी शिकायत करने के बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। घंटापाड़ा गांव के अंत से 20 किमी और सेट्रल अस्पताल से हिंगुला तक फैली एकमात्र मुख्य सड़क की स्थिति ऐसी है कि इस रास्ते पर चलना खतरे से खाली नही है।
इस रास्ते से होकर हजारों की संख्या में राहगीर, एमसीएल कर्मचारी, स्कूली छात्र व हिंगुला मंदिर जाने वाले श्रद्धालु व एरास्ता के दोनों ओर रहने वाले 8 पंचायत के लोग इसी सड़क पर निर्भर हैं। सड़क में उडने वाली भारी मात्रा में धूलकण और धुएं के कारण लोगों का दम घुट रहा है। इस सड़क पर कोयले सहित तेल मिश्रित मिट्टी खदान से आती है। जो इस सड़क के दोनो ओर पगडंडी पर गिरती है और इस वजह से सड़क के दोनों ओर धुलकण की मोटी परत बन जाती है। जो मोटरसाइकिल, साइकिल और चार पहिया वाहनों की रफ्तार के साथ उड़कर लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है।
कई बार इस वजह से वाहन फिसल जाते हैं और राहगीर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। तालचेर के विधायक, सांसद, उपजिलापाल और प्रशासनिक अधिकारी भले ही इस सड़क से रोज गुजरते हैं, लेकिन लोगों की समस्याओं पर इस तरह आंखें मूंदे हुए है जैसा कि उसे कुछ नही पता।
इससे आम तौर पर एक सवाल खड़ा हो गया है और वे एमसीएल के प्रति इतनी सहानुभूति क्यों दिखा रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उपजिलापाल को मांग पत्र देने सहित अलग-अलग समय पर विभिन्न संगठनों द्वारा आंदोलन किए जाने के बावजूद इस सड़क के की समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।





