राउरकेला में मनाया गया राष्ट्रीय गीत बंदे मातरम का भव्य उत्सव

राउरकेला में मनाया गया राष्ट्रीय गीत बंदे मातरम का भव्य उत्सव

वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत देश भक्ति, राष्ट्र प्रेम, साहस, एकता और विरोध का प्रतीक है - जुएल ओराम

राउरकेला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश में 150 स्थानों पर यह महोत्सव आज मनाया गया। ओडिशा के 5 स्थानों में से आज राउरकेला के सेक्टर-5 स्थित आमबगन चौक के पास जिला अध्यक्षा पूर्णिमा केरकेटा की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुंदरगढ़ के सांसद और केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री  जुएल ओराम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सामूहिक रूप से पूरा वंदे मातरम गीत गाया गया।  श्री ओराम ने अपने भाषण में वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत को देश भक्ति, राष्ट्र प्रेम, साहस, एकता और विरोध का प्रतीक बताया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया यह गीत 7 नवंबर 1875 को लिखा गया था और 1882 में उनकी पत्रिका आनंद मठ में प्रकाशित हुआ था। भारतीयों को एकजुट करने और अंग्रेजों से लड़ने में इस गीत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। 1896 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के कलकत्ता में हुए अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने यह गीत गाया था।

इसे कांग्रेस के सभी अधिवेशनों में गाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन मुस्लिम लीग ने यह कहकर विरोध किया कि यह हिंदू देवी दुर्गा का वर्णन है, इसलिए इसके केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे, जो कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति थी।  स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य हथियार वंदे मातरम का नारा था। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में कलकत्ता टाउन हॉल में एक विशाल सभा आयोजित की गई थी। वहां 40 हजार देशभक्त एकत्रित हुए थे। लॉर्ड कर्जन ने पुलिस को आदेश दिया कि जो भी यह गाना गाएगा उसे बंदी बना लिया जाए, लेकिन सभी ने इसका उल्लंघन करते हुए यह गाना गाया। कर्नाटक के गुलबर्गा में स्वतंत्रता आजादी का एक ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ था। इसमें स्कूल और कॉलेज के छात्र शामिल हुए थे। 28 नवंबर 1938 को छात्रों ने सामूहिक रूप से यह गीत गाया था, लेकिन फिरंगी सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके कारण छात्रों को घर में नजरबंद कर दिया गया था।
वंदे मातरम का नारा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए एक अचूक हथियार था।  वंदे मातरम के 150 साल मनाना सिर्फ अतीत को देखना नहीं है, यह देशभक्ति, एकता और प्रतिरोध की भावना के मूल्यों को फिर से स्थापित करने का एक कार्य है, जो भारत के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वदेशी तकनीक और सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी थी, जिसे हम अपनाएंगे। आज के इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राज्य कार्यकारिणी सदस्य जगबंधु बेहरा ने बताया कि वंदे मातरम गीत ने किस तरह स्वतंत्रता सेनानियों को देश प्रेम से प्रेरित किया था। जिला प्रवक्ता गंगाधर दास ने कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों का अचूक हथियार था। जिला उपाध्यक्ष दिलीप दास ने मंच संचालन किया, जबकि कार्यक्रम के संयोजक परेश मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।  जिला प्रवक्ता गंगाधर दास ने एक प्रेस बयान में बताया कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता, जिला, मंडल, बूथ स्तर के कार्यकर्ता और आम जनता तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज लेकर शामिल हुए।