मानवाधिकार रक्षक के अमानवीय कार्य
मानवाधिकार रक्षक के पूर्व ओड़िशा साधारण संपादक विश्वजीत मल्लिक ने संस्था के अध्यक्ष एवं संस्थापक मीनकेतन पटनायक पर पैसे लेकर जिला संपादक के पद पर एक अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति को नियुक्त करने का गंभीर आरोप लगाया है। और अपने पद का त्याग कर दिया।
इसके साथ साथ विश्वजित मल्लिक के सहायक कार्यकर्ताओं ने भी अपना विडियो बयान जारी कर पद का त्याग कर दिया है।
विश्वजित मल्लिक के अनुसार राज्य अध्यक्ष ने किसी से बिना सलाह मशवरा किए जिला सभापति के पदपर एम.डी.परवेज नामक एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त कर दिया जिनके ऊपर कई गंभीर आरोप है। श्री मल्लिक के अनुसार अध्यक्ष ने जिला संपादक का पद देने के लिए एम.डी.परवेज से ₹50,000 लिए है। इस बात से जिले के कार्यकर्ता दुखी होकर अपना पद का त्याग कर दिया।
एम.डी.परवेज को जिला संपादक जैसे जिम्मेदार पद पर नियुक्त करने का विरोध करने पर संस्था के संस्थापक के इशारे पर एम.डी.परवेज ने संस्था के जिला सचिव मनोज कुमार बेहरा के साथ मारपीट की और उसके एक पैर पर घातक प्रहार कर भंग कर दिया। यह जानकारी स्वयं मनोज कुमार बेहरा ने मीडिया को दी। यह घटना पुलिस तक पहुंचने के बाद पुलिस द्वारा एम.डी.परवेज को गिरफ्तार कर कोर्ट चालान कर दिया गया है।
इस खबर को कई मीडिया ने कई प्रश्न खड़े कर प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
अब देखना यह है कि मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन इस पर क्या कार्यवाही करती है। बुद्धिजीवी हलको में ऐसी चर्चा है कि जिले में ऐसे कई संगठन कार्यरत है जो समाज सेवा और मानव सेवा के नामपर लोगों से मोटी रकम ऐठते है। लोगों को इंसाफ दिलाने के नामपर उनसे पैसे ऐठने के लिए गुमराह करते है उनका शोषण करते है।
मीडिया में कई बार ऐसी संस्थओ की सच्चाई सामने आई है जैसे - कन्या आश्रम, अनाथ आश्रम के युवतियो से प्रबंधक द्वारा गलत काम करवाना, अनाथ आश्रम कर्मचारियों द्वारा बच्चों को बेचना आदि।
आज फिर एक ऐसी संस्था का सच सामने आया है जिसका गठन मानवाधिकारो की रक्षा करने के लिए किया गया था और पैसे के लालच में आकर अपने ही कार्यकर्ताओ के साथ अमानवीय हरकत कर बैठा।कहना गलत ना होगा कि जिस पद के लिए 50,हजार रुपये दी गई हो उस पद पर आसीन पदाधिकारी अपने पदका दुरुपयोग पैसे कमाने के लिए करेगा।
प्रशासन को ऐसे संस्थाओं की पहचान कर उसपर अंकुश लगाने की जरूरत है,अगर समय रहते ऐसी संस्थाओ पर कार्यवाही नही की गई तो वह दिन दूर नही जब समाजसेवा करने वाले संस्थाओ पर असामाजिक तत्वों का कब्जा हो जाएगा और रक्षक ही भक्षक बन बैठेगे।





