भागवत से भगवान कि प्राप्ति
भागवत कृपा से व्यक्ति को भगवान का सान्निध्य प्राप्त होता है नीलमणि महाराज
रामप्रवेश चौधरी (संपादक)
राजगांगपुर: भागवत कृपा से माया दूर होती है और भगवान की कृपा मिल जाती है। हम माया की बेदी पर बंजर हैं, हमारी इंद्रियाँ भी मायारूपी बिस्तर पर लेटी हुई है, इसलिए हम भगवान को नहीं देख सकते हैं, हम उन्हें महसूस नहीं कर सकते हैं।
चूँकि मनुष्य माया में रहता है, इसलिए वह संतों, तपस्वियों के पास नहीं जाता है और वह ईश्वर की उपस्थिति प्राप्त कर नहीं कर पाता है। भगवान को केवल बुद्धि से नहीं जाना जा सकता, उन्हें जानने के लिए उनकी कृपा की आवश्यकता होती है, केवल गीता पढ़ने से बुद्धि नहीं मिलती।
वृंदावन के विश्वविख्यात कथा वाचक नीलमणि महराज ने अपने दूसरे दिन के आध्यात्मिक प्रवचन में कहा कि आचरण में लाना होगा तो अज्ञानता दूर होगा और गीता का ज्ञान हासिल होगा।
मनुष्य के भाग्य पर महाराज ने कहा कि कर्म ही भाग्य है, पिछले जन्म के कर्म ही इस जीवन का भाग्य हैं, इसलिए अच्छे भाग्य के लिए मनुष्य को अच्छे कर्म करने होंगे।
नीलमणि महाराज के व्याख्यानों की श्रृंखला 23 तारीख से स्थानीय सामुदायिक केंद्र में शुरू हो गई है, जिसमें जीवन के परम लक्ष्य, मानव शरीर में विज्ञान, ब्रह्म रत, भगवत, भगवत सदगति, विदा तारा, कर्म योग, पर उनके 6 व्याख्यान शामिल हैं। भक्ति योग, रूपध्यान और साधना के ऊपर 6 दिन का व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम के आयोजक डॉ. विभूती भूषण पटनायक ने जनता से बड़ी संख्या में आकर आध्यात्मिक प्रवचन का लाभ उठाने का आग्रह किया।





