भरत कुंड में पिंडदान करने पहुंचे देश विदेश से लोग
धरमेंद्र कुमार सिंह (रिपोर्टर)
धर्मनगरी अयोध्या में आज से पिंडदान की पावन परंपरा की शुरुआत हो गई। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से यहाँ पहुँच रहे हैं और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधानपूर्वक पिंडदान कर रहे हैं।
आज ही भरतकुण्ड में भी पिंडदान की विशेष व्यवस्था शुरू की गई। मान्यता है कि यहाँ पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष मिलता है और घर-परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
पिंडदान का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पिंडदान करने से मृत आत्माओं की तृप्ति होती है। कहा जाता है कि जो संतान अपने पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करती है, उस पर पितरों की विशेष कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस अवसर पर अयोध्या के प्रसिद्ध पुरोहित ओम प्रकाश पांडेय ने कहा-
“पिंडदान करना हमारी सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। पितृपक्ष में किए गए पिंडदान से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। विशेषकर अयोध्या और भरतकुण्ड जैसे पवित्र तीर्थों पर पिंडदान करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि परिवार की समृद्धि और शांति का भी आधार है।”
श्रद्धालुओं का उत्साह पिंडदान की शुरुआत के साथ ही अयोध्या के घाटों और भरतकुण्ड पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। श्रद्धालु गंगा और सरयू के पावन जल से स्नान कर विधिविधान से पिंडदान कर रहे हैं।





