पुजारी की बेटी बनी ओएएस
रामप्रवेश चौधरी (संपादक)
कहते हैं हौसला बुलंद हो तो हर मुकाम आपकी कदम चूमेगी।इस कहावत को सच कर दिखाया है,पश्चिम ओडिशा का प्रसिद्ध शिवालय घोघर धाम में भगवान शंकर की पुजा अर्चना करने वाला एक पुजारी की बेटी। जिसने पहले प्रयास में ही ओड़िशा प्रशासनिक सेवा परीक्षा उतीर्ण कर प्रशासनिक अधिकारी बनी।
सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर स्थित घोघर मंदिर के पुजारी की बेटी ओडिशा प्रशासनिक सेवा परीक्षा प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण कर ली है। राजगांगपुर में इसकी खूब चर्चा हो रही है,पुजारी की बेटी शहर में प्रशंसा की पात्र बनी हुई हैं ।

राजगांगपुर प्रखंड अंतर्गत आनेवाले घोघर ग्राम के ढेलुआ पंचायत निवासी जिया देवसा की पुत्री गीतांजलि देवसा (22) ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने पहले ही प्रयास में ओडिशा प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है।
पिता देवसा घोंघेदेश्वर जनजाति के उपासक थे। उनकी पत्नी, लिली देवसा और तीन बेटियाँ थीं। खेती और मंदिर में पूजा से होने वाली आय से परिवार का भरण पोषण चलता है।इनका जीवन कठिनाइयों से भरा होने के बावजूद इस दंपति ने कभी भी अपने तीनों लड़कियों की पढ़ाई नही छुड़वाई । तीन बेटियां उच्च शिक्षित हैं। गीतांजलि को बचपन से ही पढ़ने में गहरी रुचि थी। कांशबहाल के डीएवी स्कूल से स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद, गीतांजलि ने राउरकेला सरकारी कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने। कांशबहाल के आईआईपीएम से एमबीए की डिग्री हासिल की।
इनका उद्देश्य खेत में काम करके अपने पिता की आर्थिक मदद करना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण मंदिर से लेकर स्कूल तक सब कुछ बंद था।उन्होंने निजी क्षेत्र में दबाव महसूस किया. जिसने उनके जीवन का उद्देश्य ही बदल दिया। आख़िरकार उन्होंने एक प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर तैयारी शुरू कर दी। बिना किसी के मदद के स्वयं प्रयास कर पहली बार में ही ओडिशा प्रशासनिक सेवा उतीर्ण कर अपने लक्ष्य को हासिल की।
उन्होंने टाॅप तालिका रैंकिंग में 412वीं रैंक हासिल की है।गीतांजलि चार महीने से हैदराबाद की एक निजी कंपनी में काम कर रही हैं। अपनी सफलता पर गीतांजलि का कहना है कि वह आईएएस परीक्षा के लिए पढ़ाई और तैयारी जारी रखेंगी।





