योजनाओं की पोल खोलता प्रसूता की मौत

योजनाओं की पोल खोलता प्रसूता की मौत

विरमित्रापुर विधानसभा क्षेत्र में समय पर इलाज न‌ मिलने की वजह से हुई प्रसूता की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रसूता के लिए ममता योजना के तहत  सरकार की ओर से किए गए  तमाम इंतजामों की पोल खोल कर रख दी।
जंगलों से अच्छादित आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिला पठारो‌,पहाडो, उबड़-खाबड़, रास्तों से पटी पड़ी है, इसलिए चिकित्सा इंतजाम मरीज की पहुंच में होना चाहिए ताकि समय रहते मरीज को चिकित्सा सुविधा मिल सके।
जिलापाल ने ऐसे रास्तों के लिए जहां चारपहिया अस्पताल गाड़ी  नहीं जा सकती, वहाँ दोपहिया बाइक एंबुलेंस की शुरुआत की है पर द्रौपती की मृत्यु ने बाइक एंबुलेंस सेवा की भी पोल खोल‌ कर रख दी।

क्या इसके लिए सरकारी नितियां जिम्मेदार नहीं हैं?

जरा पिछे मुडकर याद करे उन‌ धाईयो‌ को जो घर में ही सफल प्रसव करवा देती थी।
उन‌ झोलाछाप डॉक्टरो‌ को जो‌ ऐसे समय में प्राथमिक उपचार कर रोगीयो की जान‌ बचा देते थे। दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाये देने वाले ये चिकित्सक जिन्हें मिडिया ने झोलाछाप की संज्ञा दे रखी है ऐसे मौकों पर खुद ही मरीजों को पास के बड़े अस्पतालो में ले जाते थे इसके लिए वे हर तरह के चिकित्सको , अस्पतालो से अपना संपर्क बना कर रखते थे। पर मिडिया द्वारा इन लोगों द्वारा दिए जा रहे सेवाओं को ग़लत ढंग से पेश किया जाता रहा , और सरकारी नीतियों ने धाईयो को अपंग बना कर रख दिया। जिससे आनेवाले पीढ़ी इस हुनर को सिखने में दिलचस्पी नहीं दिखाई और धिरे धिरे यह विद्या मानो विलुप्त सी होती गई।
पर सरकारी आदेशानुसार गर्भवती महिलाये केवल आशाकर्मी की ही मदद लें सकती है उनके निर्देशानुसार ही चलना होता है, और प्रसव आशाकर्मी की मध्यस्थता से सरकारी अस्पतालो में ही होना है,वरना योजनाओ‌ का लाभ नहीं मिलेगा,जिससे आनेवाले दिनों में‌ बच्चे को विद्यालय से लेकर नौकरी पाने तक में कई तरह के असुविधाओ का सामना करना पड़ेगा।
यही वजह है कि प्रसुता किसी धायी या गांवो‌ में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे लोगो की सेवाएं लेने से कतराने लगी हैं।