धूमधाम से मनी दशहरा करम

दशहरा करम राउरकेला के तिलकानगर में स्थित रघुनाथ सामंत के घर में आयोजित किया गया। इस त्यौहार के आयोजन में लीलमोहन अधार सांडिल,सुखन मुंडा़ का प्रमुख योगदान रहा।  

करम / करमा झारखंड, बिहार,उडिशा,पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख त्यौहार है। दशहरा करम बिजय दशमी के दूसरे दिन मनाया जाता है।जो लोग भादो मास मे करम पूजा नही कर पाते है वे दशहरा करम का पालन करते है। इस त्यौहार में श्रद्धालु प्रकृति की पूजा करते हैं। इस दिन नये अन्न का भोग लगाकर विधिवत पुजन किया जाता है, उसके पश्चात सभी नये अन्न प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है।

दशहरा करम सरना समुदाय के लोगो का प्रमुख त्यौहार है, यह त्यौहार बिजयदशमी के दूसरे दिन  मनाया जाता है।जो लोग भादो करम नही मना पाते वे दशहरा करम का पालन करते है। इस त्यौहार में प्रकृती की पुजा की जाती है। कुंवारी कन्यायें अपने परिवार, समाज की मंगल कामना करते हुए तीन दिन तक उपवास रखती है। यह त्यौहार भी भादो-करम की ही तरह मनाया जाता है। दरअसल करम पर्व नये अन्न की आने की खुशी में मनाया जाता है जिसमें धान को प्रमुख अन्न के रूप में लिया जाता है।

पुजा संपन्न होने के बाद नये अन्न से तैयार किए गये व्यंजन को प्रसाद के रूप में सेवन किया जाता है। प्रसाद सेवन के बाद समाज के लोग करम पुजा स्थल पर रातभर नाचगान कर उत्सव मनाते है। करम पूजा किसी पुजारी या पंडित द्वारा नही की जाती है बल्कि यह पुजा घर के मुखिया या बड़े बुजुर्ग द्वारा किया जाता है।