तीन उग्रवादीयों के आगे पाँच जवान कैसे हार गए जिंदगी की जंग

तीन उग्रवादीयों के आगे पाँच जवान कैसे हार गए जिंदगी की जंग

नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)

सवाल पूछिए सरकार से.........

कि कैसे कोकेरनाग में सिर्फ 3 उग्रवादियों को मारने से पहले हमारे 5 बहादुर जवान(जिनमे तीन अफसर भी शामिल है,वो.)शहीद हो गए..??

क्या ऐसी ही तैयारियों से चीन और पाकिस्तान से लड़ेगी हमारी सरकार,, हमारी सेना..या हमारे बकैत न्यूज चैनल,,, जो स्टूडियो में ही खड़े खड़े किसी को भी चित्त करने की क्षमता रखते हैं।।

एक तरफ गोदी मीडिया गला फाड़कर पूरे 24_24 घंटे चिल्ला रहा है,देश की सेना को मोदी जी के आने से फला साधन मिल गया,ढिकना शस्त्र दे दिया गया,,70 साल में पहली बार चीन,पाकिस्तान तो क्या अमेरिका भी हमारी सेना को देखकर कांपने लगा है।।

बात अगर सिर्फ भारतीय सेना की हो तो इसमें कोई दो राय नहीं है, कि भारतीय सेना की दिलेरी का लोहा पूरी दुनिया मानती है। परंतु आज युद्ध लड़कर जितने के लिए अत्याधुनिक संसाधन और मजबूत संचार/सूचना तन्त्र सबसे ज्यादा जरूरी है।

दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है,कि हम देश के अंदर बने अघोषित युद्ध क्षेत्र में भारतीय सेना के कर्नल,मेजर और पुलिस के एस. पी.,,डी.एस.पी. रेंक के अफसरों को न तो उम्दा क्वालिटी के बुलेट प्रूफ जैकेट दे पाए है न बुलेट प्रूफ वाहन ही दिए हैं।। ऊपर से हमारा सरकारी सूचना तंत्र आज भी आतंकवादियों से  या नक्सलियों से दो कदम पीछे है।।

शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी से लेकर शहीद कर्नल मनप्रीत सिंह तक की शहादत की घटनाएं,,प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। यकीन मानिए शोक में डूबे रहने के बजाए,,शहादत के सारे विषय आज सरकार से सवाल करने लायक है।