डालमिया विद्या मंदिर में ग्रैंड पेरेंट्स डे का आयोजन

दादा दादी के साथ समय बीता कर बच्चे सीख रहे हैं संस्कार---डाॅ सुशील दाहिमा

डालमिया विद्या मंदिर में ग्रैंड पेरेंट्स डे का आयोजन

सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर स्थित डालमिया विद्या मंदिर के सभागार में विद्यालय के प्रचार्य डॉ. राघवेन्द्र द्विवेदी के नेतृत्व में ग्रैंड पेरेंट्स डे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार, कवि,लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ सुशील दाहिमा"  अभय" व सम्मानित अतिथि के रूप में संवाद पेपर के पूर्व संपादक व शिक्षक अरुण पंडा अपनी धर्मपत्नी के साथ उपस्थित थे।
कार्यक्रम में मंच संचालन ममता सारडा व तुलिका पांडे ने करते हुए कार्यक्रम के महत्वपूर्ण बिंदूओ पर प्रकाश डाला। 

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियो द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। कार्यक्रम के आरम्भ में विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों ने बहुत ही खूबसूरत व मनमोहक अंदाज में दादा दादी व नाना नानी पर आधारित  नृत्य,गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।

विद्या मंदिर के प्राचार्य डॉ राघवेन्द्र द्विवेदी ने अपने अंदाज में सभा को संबोधित करते हुए इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला,उन्होने अपने वाक्तब्य में अभिभावकों को सबोधित करते हुए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा,सीख और संस्कार देने का अनुरोध किया।

वहीं मुख्य अतिथि डॉ सुशील दाहिमा ने उपस्थिति अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि- आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में एकल परिवार का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर इस धारा के समांतर में कुछ लोग संयुक्त परिवार के बीच रहना पसंद करते हैं और एक साथ रहने में विश्वास रखते हैं। इनका मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने वाले घर के बुजुर्गों की मान मर्यादा का विशेष ध्यान दिया जाता है, युवा पीढ़ी के लिए बुजुर्गो की राय विशेष मायने रखती है।
वहीं डॉ दाहिमा ने ग्रैंड पेरेंट्स के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संयुक्त परिवारों में बच्चों का लगाव अभिभावकों से ज्यादा दादा दादी,नाना नानी के प्रती होता है, और बच्चो के साथ दादा दादी भी ज्यादा समय बीताना बेहद पसंद करते हैं, बच्चों के साथ खेलना, कहानियां सुनना बेहद पसंद करते हैं।जो उनके जीवन में अच्छे संस्कार देने के साथ ही जीवन में बड़ा पाठ सिखाते हैं। ज्यादातर अभिभावक सिर्फ बच्चों की फरमाइशे और जिद पूरी करते हैं, क्यों कि उनके पास बच्चो के साथ बिताने के लिए समय नहीं होता है।
आगे उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार में प्रेम बढ़ता है और एकजुटता बनी रहती है। बच्चों की जिंदगी में दादा दादी,नाना नानी का एक अलग महत्व है। इनसे बच्चों में संस्कार पनपते हैं। इन्हीं से बच्चे सीखते हैं कि अपने अभिभावकों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
डॉ दाहिमा ने कहा कि मेरा मानना है कि दादा दादी,नाना नानी बच्चों की एक तरह से लाइब्रेरी है तो कभी गेम सेंटर।वे बच्चों के शिक्षक है और बच्चे उन्हीं से सिखते है कि बड़ों को कैसे आदर सम्मान दिया जाएं। इस मौके पर उन्होंने हिंदी दिवस के पखवाड़े पर हिन्दी को समृद्ध बनाने के लिए सभी से अपील की और कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार सब की जिम्मेदारी है। जनमानस की भाषा ही सर्वश्रेष्ठ भाषा है और राष्ट्र भाषा भी जनमानस की भाषा होनी चाहिए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ सुशील दाहिमा व अन्य अतिथि को शाल देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेयी हुए बच्चों को पुरस्कृत  किया।