जिलापरिषद पद पर नुआगाँव "ख" का विश्लेषण
लमहरहर शम्भू कुमार चौधरी (मुख्य संपादक)
नुआगाँव "ख" में जिला परिषद् पद पर तीन उम्मीदवार है। इसबार की तीनो उम्मीदवारो पर नजर डाला जाय तो एक ओर समिति सदस्य से प्रखंड अध्यक्ष (ब्लाक चेयरमैन) तक की सफर तय कर चुकी बीजद प्रत्याशी सुशीला टोप्नो राजनीति में अनुभव रखने के साथ राज्य की सत्तासीन पार्टी का समर्थन है जिसका उन्हें भरपूर लाभ मिलेगा।
वही इन्हें समाज के प्रभावशाली लोगो का एक तरफा समर्थन भी है। प्रखंड़ अध्यक्ष का पद संभाल चुकी सुशीला अपना राजनैतिक छवी बना चुकि है।
जबकि इसकी प्रबल प्रतिद्वंदी भाजपा उम्मीदवार संजीता किस्पोट्टा राजनीति में एक नया चेहरा है,भाजपा शासित बिरमित्रापूर बिधानसभा क्षेत्र और केन्द्र में मोदी सरकार की छवि का इन्हें लाभ मिल सकता है। शिक्षिका के पेशे से जुड़ी संजीता किस्पोट्टा को समाज में अध्यापिका की छवि का भी लाभ मिल सकता है।
वही कांग्रेस प्रत्याशी सुचिता लुगुन इन दोनो के मुकाबले कमजोर प्रत्याशी मानी जा रही है। जहाँ भाजपा और बीजद उम्मीदवार रैलियाँ और बैठके आयोजित कर रही है वही कांग्रेस उम्मीदवार की चर्चा भी न के बराबर है,इन्हे क्षेत्र में जार्ज तिर्की के छवी का भी कोई बहुत लाभ मिलता नजर नही आ रहा है।
कुल मिलाकर नुआगाँव "ख" में जिलापरिषद पद पर भाजपा और बीजद के बीच ही मुकाबला होना है।
अब मतदाताओ की बात करे तो तीनो प्रत्याशी आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती है इसलिए इसमे कोई शक नही की जातिगत वोट सभी को मिलेगा। एक ओर जहाँ कांग्रेस उम्मीदवार वोट काटने का काम करेगी वही ओराम, मुंडा़ समाज के वोट भाजपा और बीजद इन दोनो के बीच बटेगी।
बात करे मुस्लिम वोटरो की तो कुछ भाजपा से बीजद में गए मुस्लिम प्रतिनिधियो की वजह से मुस्लिम वोटर बंटेगे।वही इस समुदाय में कुछ लोग कांग्रेस के भी कट्टर समर्थक है। इसलिए इस समुदाय का कुछ वोट कांग्रेस के पाले में जाएगा।
नुआगाँव "ख" में आने वाले क्षेत्र में एक बड़ी संख्या सामान्य वर्गो की है जिनमे तेली,बनीया,पंडित और माहतो व अन्य जाती के लोग आते है, जिनमे माहतो बहुयात में है।
सामान्य वर्ग के ज्यादातर वोट भाजपा और बीजद के बीच बंट सकते है, लेकिन संभव है कि माहतो समाज का अधिकांश वोट बीजद के पाले में जा सकता है। इसका एक कारण यह भी है कि कुछ माहतो जो भाजपा के समर्थक थे उन्होने बीजद का दामन थाम लिया है।
बीरमित्रापुर बिधान सभा के भाजपा विधायक ने अपने चुनावी रैली में जनता से कई वादे किए थे जिन्हे उन्होने पूरा नही किया ऊपर से भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओ के काम से भी जनता नाखुश नजर आ रही है,इस वजह से भी जनता का मुड़ बदल सकता है,और वह दूसरे पार्टी को समर्थन दे सकते है।वही भाजपा उम्मीदवार संजीता किस्पोट्टा को भाजपा विधायक शंकर ओराम का गृह क्षेत्र होने से स्थानीयता का लाभ तो मिलेगा साथ ही श्रीमती किसपोट्टा को उनके उन रिश्तेदारो का भी भरपूर लाभ मिलेगा जो पहले से राजनीति में स्थानीय नेता के रूप में एक पहचान बना चुके है।
कुल मिलाकर नुआगाँव "ख" में भाजपा बनाम बीजद का चुनावी दंगल होगा। अब देखना यह है कि इस दंगल का बिजेता कौन होगा, जिलापरिषद की कुर्सी किसके पाले में जाएगी।





