ओडिशा में तीन साल में हाथी हमलों से 443 लोगों ने गंवाई जान
सतिश शर्मा (उप संपादक)
भुवनेश्वर, 2 अप्रैल: ओडिशा में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में जंगली जानवरों, विशेषकर हाथियों के हमलों में 525 लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,391 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 443 लोगों की जान केवल हाथी हमलों में गई।
राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंगखूंटिया ने यह जानकारी 31 मार्च को विधानसभा में दी। भाजपा विधायक पद्मलोचन पंडा के लिखित प्रश्न के उत्तर देते हुए मंत्री सिंगखूंटिया ने यह आंकड़े दिये।
वर्षवार स्थिति
2022-23: 175 मौतें, 408 घायल
2023-24: 186 मौतें, 445 घायल
2024-25: 164 मौतें, 538 घायल
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
मौतों के मामलों में ढेंकनाल (92), अंगुल (54), क्योंझर (52), बारीपदा (36), संबलपुर (34) और बणई (33) शीर्ष पर रहे।
वहीं घायलों में क्योंझर (155), ढेंकनाल (113), खुर्दा (87), रेंढ़ाखोल (77), खारियार (66) और देवगढ़ (65) प्रमुख रहे।
संपत्ति और खेती को भारी नुकसान
मानव-वन्यजीव संघर्ष के चलते:
5,587 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
1,050 घर पूरी तरह नष्ट
47,499.12 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई
वन्यजीवों की भी बड़ी संख्या में मौत
इसी अवधि में 264 हाथियों की मौत हुई, जिनमें 132 असामान्य कारणों जैसे बिजली का करंट , अवैध बिजली के तारों और लटकते हाई-वोल्टेज तारों के कारण,
अवैध शिकार -हाथी दांत के लिए हाथियों का शिकार, रेलवे ट्रैक पार करते समय हाथियों का ट्रेनों की चपेट में आना, जंगली सुअर के शिकार के लिए रखे गए "देसी बम" खाने से भी हाथियों की मौत के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 4 रॉयल बंगाल टाइगर, 25 तेंदुए और 1,426 अन्य वन्यजीव मारे गए।
सरकार की कार्रवाई शिकार पर रोक लगाने के लिए 3,074 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि
मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए राज्य के विभिन्न वन प्रभागों में 1,420 अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए गए हैं, जो हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखकर ग्रामीणों को समय पर सतर्क करते हैं। राज्य सरकार प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए "गज साथी" जैसी पहल और सौर बाड़ लगाने जैसे कदम उठा रही है।





