एनआइटी राउरकेला ने खोज लिया है अपशिष्ट जल का समाधान

एनआइटी राउरकेला ने खोज लिया है अपशिष्ट जल का समाधान
एनआइटी राउरकेला ने खोज लिया है अपशिष्ट जल का समाधान

प्रेस विज्ञप्ति:राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला 

"एनआईटी राउरकेला ने औद्योगिक अपशिष्ट जल के शोधन के लिए एक सतत समाधान के रूप में फोटोकैटलिटिक गोलाकार कंक्रीट बीड्स (मोतियों) का विकास किया"

- विकसित की गई तकनीक बाहरी ऊर्जा पर निर्भर नहीं करती है, जो इसे ग्रामीण और संसाधन-सीमित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनती है।

राउरकेला, 30 मई 2025 - राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) की शोध टीम ने एक पुन: उपयोग योग्य फोटोकैटलिस्ट प्रणाली विकसित की है जो प्राकृतिक सूर्य प्रकाश का उपयोग करके औद्योगिक अपशिष्ट जल की सफाई करने में सक्षम है। गोलाकार कंक्रीट मोतियों (बीड्स) पर आधारित यह नवीन तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट से होने वाले जल प्रदूषण के लिए एक कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान कर सकती है।
यह शोध पत्र एनआईटी राउरकेला के बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. शुभंकर पॉल, शोध स्नातक डॉ. सोहेल दास, और शोधार्थी उमा शंकर मंडल द्वारा सह-लेखित है।
शोध टीम ने विकसित की गई तकनीक पर दो पेटेंट भी दायर किए हैं, जिनका आविष्कार प्रो. शुभंकर पॉल, उमाशंकर मंडल, आशुतोष सिंह और डॉ. सोहेल दास द्वारा किया गया है। इनमें शामिल हैं –

• शीर्षक - टाइटेनिया और ग्राफीन ऑक्साइड आधारित फोटो-फेंटन कैटेलिस्ट और उसका उपयोग
पेटेंट आवेदन संख्या - 202331071180
वर्तमान स्थिति - आवेदित और प्रकाशित

• शीर्षक - फोटोकैटेलिस्ट के तौर पर मेटल डोप्ड नैनोटाइटेनिया और सिलिका कंज्युगेट के साथ कोटेड ग्रीन कंक्रीट बीड्स का विकास और उसका उपयोग
पेटेंट आवेदन संख्या - 202431083867
वर्तमान स्थिति - आवेदित, प्रकाशित और एफईआर जारी

जल स्रोतों में रासायनिक अपशिष्ट का प्रवाह एक वैश्विक चिंता का विषय है। वस्त्र, चमड़ा, पेंट, दवा और धातु प्रसंस्करण जैसे उद्योगों से निकलने वाले सिंथेटिक डाई और कार्बनिक कम्पाउंड जैसे हानिकारक रसायन जल स्रोतों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं और मनुष्यों में कैंसर या अंगों में विषैलेपन का कारण बन सकते हैं।

जहाँ एक ओर वैश्विक स्तर पर किफायती उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) या विधियाँ विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं अधिकांश प्रयास ऐसे उत्प्रेरक पदार्थों पर केंद्रित हैं जो सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके रासायनिक अभिक्रियाओं को संचालित करते हैं। हालांकि, अधिकांश फोटोकैटेलिस्ट को दोबारा उपयोग करना कठिन होता है, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर प्रयोग के लिए व्यावहारिक बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसके अतिरिक्त, इन उत्प्रेरकों को अभिक्रिया संचालित करने के लिए अल्ट्रावायलेट (UV) प्रकाश की आवश्यकता होती है, जिससे विशेष UV स्रोतों की जरूरत पड़ती है, जो प्रणाली की जटिलता और लागत को बढ़ा देती है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने प्रो. एस. पॉल के नेतृत्व में एक इनोवेटिव फोटोकैटलिस्ट प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली में आयरन-डोप्ड नैनो-टाइटेनिया (Fe-nTiO₂) को ग्रैफीन ऑक्साइड के साथ जोड़ कर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए गोलाकार कंक्रीट मोतियों पर स्थिर किया गया है। यह बीड्स कोयले की छाई (फ्लाई ऐश) से प्राप्त जिओलाइट का उपयोग कर ग्रीन कंक्रीट से बनाए गए हैं, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का एक सतत तरीका है और उच्च यांत्रिक मजबूती, छिद्रता तथा अवशोषण क्षमता प्रदान करता है। यह कम्पोजिट सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके अपशिष्ट जल में मौजूद विषैले प्रदूषकों को प्रभावी ढंग से तोड़ने में सक्षम है।

विकसित फोटोकैटलिस्ट की व्यावहारिक उपयोगिता पर बात करते हुए एनआईटी राउरकेला के बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. शुभंकर पॉल ने कहा, “जब इस प्रणाली का परीक्षण अत्यधिक रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) वाले कृत्रिम अपशिष्ट जल पर सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में किया गया, तो इस सिस्टम ने सीओडी को 82 प्रतिशत से अधिक कम कर दिया, जो जल गुणवत्ता का एक प्रमुख सूचक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फोटोकैटलिस्ट प्रणाली 15 बार पुनः उपयोग के बाद भी 90% से अधिक कार्यक्षमता बनाए रखने में सक्षम रही।”

प्रो. पॉल ने यह भी बताया, ‘‘यह तकनीक बड़े पैमाने पर अपशिष्ट जल के तेजी से उपचार का स्थायी समाधान दे सकती है।’’

विकसित किए गए फोटोकैटलिस्ट मोतियों को सूर्य प्रकाश के संपर्क में आने वाले अपशिष्ट जल भंडारण टैंक में डाला जा सकता है और जल शोधन की प्रक्रिया पूर्ण होने पर आसानी से निकाला जा सकता है। क्योंकि यह तकनीक किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत पर निर्भर नहीं करती, इसलिए इसे ग्रामीण और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में भी आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है।विकसित की गई तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट, नगरपालिका अपशिष्ट जल और प्रदूषित प्राकृतिक जल स्रोतों के उपचार की क्षमता रखती है। जैसे-जैसे जल प्रदूषण को लेकर वैश्विक चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं, एनआईटी राउरकेला का यह नवाचार इस चुनौती का समाधान करने के लिए एक समयानुकूल और सतत प्रतिक्रिया प्रदान करता है।