आदिवासी बहुल जिले मेः शोषित आदिवासी

 सूंदरगढ़ जिले का यह सबसे बडा़ दुर्भाग्य यह है कि जिले में सरपंच से लेकर सांसद तक आदिवासी है, और आदिवासी कल्याण मंत्री भी सुंदरगढ़ जिले का निवासी ही है इसके बाद भी जीले के आदिवासियों ही शोषित है। जिले  के आदिवासीयो को अपना ही अस्तित्व बचाने के लिए एक के बाद यातनाओं से गुजरना पड रहा है। अब आप सोच रहे होगे मै ऐसा क्यों‌ कह रहा हूँ। तो सूनिए समाजसेवी अभिषेक सिंह को।
 यहाँ कहना गलत नहीं होगा कि  बिकास के नामपर जंगल उजाडे जा रहे है, और विल्ड लाइफ सेंचुरी बनाए जा रहै है। 
पहले जंगली जानवरों‌ का जमकर शिकार हुआ और फिर संरक्षण के नाम पर इन्हैं पिंजरों में कैद किया गया। 
ठीक इसी तरह सुंदरगढ़ जीले से धीरे धीरे आदिवासीयो के जमीन, कभी माईंस के लिए तो कभी रेलपटरी और कभी फैक्टरी के लिए लिया गया। पुनर्वास के नामपर आसियाने उजाड़ दिए गए‌ और‌ फिर आदिवासीयो‌ के पुतले संग्रहालय में सजाए गए। और इन सबको देखने के लिए सैकड़ों रूपये के टिकट लगाए गए। प्राकृति की गोद में फलने फूलने वाले, और प्राकृति को पूजने वाले 
आदिवासीयो के लिए इससे बडा़ दर्द और इससे बडा़ मजाक क्या और भी कुछ हो सकता है।