होलिका दहन के स्थान पर बच्चों का पार्क बनाने की तैयारी में नगरपालिका
रामप्रवेश चौधरी (संवाददाता)
राजगांगपुर: फुटपाथ पर दुकान लगा कर किसी तरह रोजगार करने वाले दुकानदारों पर कहर बरपाने के बाद अब नगरपालिका शहरवासियों की आस्था से जुड़े सदियों पुराने स्थान को अधिग्रहण करने की रणनीति बनाने की कोशिश कर रही है। खबर ये है कि विगत कुछ दिनों से नगरपालिका के ईओ बिनोद चंद्र पंडा व अन्य विभागीय अधिकारी शहर के होलिका दहन स्थान को अधिग्रहण करने के फ़िराक में निरीक्षण कर एक रणनीति बनाने की तयारी में लगे हैं |
वहीं दूसरी ओर खबर ये भी है कि इस स्थान पर बच्चों का पार्क बनाने की तैयारी में जूटी है नगरपालिका।
जबकि शहर में वीर प्रताप गौशाला, स्वर्ग द्वार, शीतल मंदिर, मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला और होलिका दहन की देखभाल की जिम्मेदारी राजगांगपुर विकास परिषद के अधीन में है। खबर ये भी है कि इस बाबत उन्हें कोई भी जानकारी नहीं दी गई है जो नगरपालिका की कार्रवाई पर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।
विगत दो वर्ष पहले शहर की सुप्रसिद्ध सार्वजनिक गणेश पूजा स्थल की जगह विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के मद्देनजर लोगों को सुविधा उपलब्ध कराने की आड़ में उस जगह के समीप एक कल्याण मंडप का निर्माण कर पूजा की जगह को अवरूद्ध कर दिया गया।
फलस्वरूप जगह कम होने से सदियों से गणेशोत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करने में असुविधा उत्पन्न हो गई है। वहीं कल्याण मंडप के चारों ओर बनाई गई जल निकासी के लिए नालियों से भी गणेशोत्सव के दौरान आने जाने वाले भक्तों को ढेर सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर नगरपालिका के द्वारा कई वर्ष पहले गांधी पार्क का निर्माण किया गया है और इस पार्क के सौंदर्यीकरण करने की आड़ में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के खेलने के लिए लाखों रुपए खर्च कर उपकरण लगाए गए जो आज देखरेख के अभाव में कचरों के अंबार में तब्दील होने के कगार पर पहुंच गया है।
वहीं दूसरी ओर नगरपालिका की ओर से कोरोना काल में सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को पार्क में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया और नगरपालिका की वाहनों को वहां पर खड़ा कर एक पार्किंग स्थल का रुप दे दिया गया है। वाहनों के खड़ा करने के कारण गांधी पार्क की स्थिति काफी दयनीय हो गई है।
वहीं स्थानीय बस अड्डे पर लोगों की सुविधा के मद्देनजर एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया गया था,जिसके नवीनी करण के लिए इसे तोड़ कर पुनर्निर्माण की तैयारी चल रही है। वहीं शौचालय की सुबिधा होने के बावजूद लाखो रुपये की लागत से पुनः एक नया शौचालय का निर्माण कार्य नगरपालिका की ओर से किया गया है, जिसमें हर समय ताला लटका हुआ रहता है।बस स्टैंड पर दो दो शौचालय बनाए जाने का तात्पर्य क्या है? केवल सरकारी रुपयों की बरबादी के अलावा और कुछ नहीं है। जबकि हकीकत तो यह है कि बस अड्डे पर बस खड़ी करने की जगह का अभाव बना रहता है।
अगर होलिका दहन के स्थान को बच्चों के पार्क में तब्दील कर दिया गया तो सदियों से चली आ रही परंपरा पर कुठारा घात होगा | पार्क तो कही और भी बनाई जा सकती है पर इस स्थान को पार्क बना दिया जाये तो होलिका दहन कार्यक्रम का कार्यक्रम कहाँ होगा ? इस बाबत नगरपालिका के ईओ बिनोद चंद्र पंडा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। पर उन्होंने कॉल स्वीकार्य हि नहीं किया |
खबर ये भी है कि होलिका दहन स्थान को अधिग्रहण करने के लिए जिला प्रशासन के पास लिखित अनुरोध पत्र भेजा गया है।
अगर ऐसा होता है तो शहरवासियों की आस्था को ठेस पहुंचाने की कोशिश से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इस बाबत राजगांगपुर विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल उर्फ बल्ली भाई से पुछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं है है।अगर ऐसा हो रहा है तो बातचीत की जाएगी |





