स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित पैरामिलिट्री परिवार
जिला स्तरीय स्वास्थ्य डिस्पेंसरियों की मांग सालों से लम्बित..
नितिन सिन्हा (संपादक-खबरसार)
नई दिल्ली: देश के अधिकांश राज्यों में जिला स्तर पर सीजीएचएस डिस्पेंसरियां/ वेलनेस सेंटर उपलब्ध न होने के कारण 20 लाख पैरामिलिट्री परिवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि *अभी 10 जनवरी 2023 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक के द्वारा राज्यों के 21 विभिन्न शहरों में नई डिस्पेंसरियां वेलनेस सेंटर खोले जाने हेतु विकल्प की तलाश के लिए आफिस आर्डर निकाला गया है। उपरोक्त आदेश में डिस्पेंसरियों खोलने के लिए संभावनाएं एवं जगहों की तलाश के लिए संबंधित राज्यों के डायरेक्टर सी.जी.एच.एस को जल्दी कार्यवाही करने के लिए कहा गया है।
रणबीर सिंह आगे कहते हैं कि जहां तक 20 लाख पैरामिलिट्री परिवारों को बेहतर सुविधाओ के साथ स्वास्थ्य लाभ मुहैया कराने का सवाल है,तो दुरदराज,दुर्गम, पहाड़ी , गांव देहात के इलाकों में जवान और उसके परिवार वाले निवास करते हैं। जहां दूर दूर तक कोई सी जी एच एस डिस्पेंसरी या पैनल अस्पताल नजर नहीं आता है।
आपातकालीन स्थिति में ज्यादातर मरीज शहर के अस्पतालो तक पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देते हैं। केंद्रीय सरकार अपने कर्मियों को सेवानिवृत्त होने पर एक हजार मेडिकल अलाउंस देती है,जो कि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अच्छे डॉक्टर की कंसलटेसन फीस ही हजार रुपए के आसपास होती है,इस पर दवा लेना दूर की बात हो जाती है।
कॉनफैडरेसन का प्रतिनिधि मंडल द्वारा अपने कल्याणकारी सुविधाओं को लेकर पिछले 8 सालों से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री,केंद्रीय गृह मंत्री,विभिन्न राज्यों के मुख्य मंत्रियों एवं महामहिम राज्यपालों से मुलाकात कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु ज्ञापन सौंपकर पुनः एक बार गुहार लगाई गई। हरियाणा,पंजाब राजस्थान मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर व दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्रियों, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटका, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मेघालय के महामहिम राज्यपालों, लेफ्टीनेंट गवर्नर लेह लद्दाख व एडवाइजर जम्मू कश्मीर राज्यपाल से मुलाकात कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार साथ ही जिला स्तर पर सीजीएचएस डिस्पेंसरियां खोलने वास्ते मेमोरेंडम सौंपे गए।
कॉनफैडरेसन चेयरमैन व पूर्व ए डी जी सी आर पी एफ एच आर सिंह जो कि स्वयं प्रतिनिधि मंडल द्वारा की गई मुलाकातों का हिस्सा रहे हैं। पूर्व ए डी जी के कहे अनुसार हरियाणा में रेवाड़ी नारनौल, झज्जर,भिवानी,हिसार, राजस्थान में सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर, सीकर,अलवर, अजमेर मध्य प्रदेश में भिंड, मुरैना, दतिया, गुना, नीमच, शिवपुरी, रींवा , हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा,मंडी, हमीरपुर, सोलन, उत्तराखंड में पोड़ी गडवाल, चमोली, नैनीताल, उत्तराकाशी, बागेश्वर, पिथोरागढ, बिहार में मुज्जफरपुर, समस्तीपुर, बरौनी, सीतामढ़ी, दरभंगा, भागलपुर, बक्सर, बेगुसराय, कटिहार, किसनगंज, हाजीपुर,छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव,जगदलपुर, बिलासपुर,दुर्ग भिलाई,उत्तर प्रदेश में गाजीपुर बलिया, आजमगढ़ ,अमेठी, बरेली, बिजनौर, झांसी, रामपुर रायबरेली,वाराणसी मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, कानपुर, इटावा, अलीगढ़, पंजाब में संगरूर रोपड़, जालंधर, भटिंडा फिरोजपुर, फतेहगढ साहब, फाजिल्का, जम्मू कश्मीर में लेह कारगिल, पुंछ, मैंढर, राजोरी आदि ना जाने कितने सैकड़ों जिले जहां पर सबसे ज्यादा पैरामिलिट्री फोर्सस के सेवारत एवं सेवानिवृत्त जवानों के लाखों परिवार स्थाई रूप से निवास करते हैं। जो कि सीजीएचएस डिस्पेंसरियों व अन्य पैनल अस्पतालों के ना होने से तिल_तिल कर मरने को मजबूर हैं। इसी तरह के कुछ हालात गुजरात,महाराष्ट्र, केरला,कर्नाटका,आंध्रप्रदेश, तेलंगाना,तमिलनाडु उड़ीसा व उत्तरी पुर्वी राज्यों के पैरामिलिट्री परिवारों की भी है।महासचिव रणबीर सिंह द्वारा माननीय गृह राज्य मंत्री जी व केंद्रीय सचिव से की गई मुलाकातों में जिला स्तर पर सी जी एच एस डिस्पेंसरियां खोलने के बारे में गुहार लगाई गई है,ताकि अर्ध सैनिक बलों के जवानों और उनके परिवार वालों को जिला स्तर में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।
सी जी एच एस डिस्पेंसरियों के खुलने से ना केवल पैरामिलिट्री परिवार लाभान्वित होंगे बल्कि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी। इसके लिए माननीय गृह राज्यमंत्री से राज्यवार सर्वे करवाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। ताकि जहां पैरामिलिट्री परिवारों की संख्या ज्यादा है उन जिलों में डिस्पेंसरियों का विस्तार किया जा सके। सरकार चाहे सर्वेक्षण कराने का बोझ रिटायर्ड कर्मियों पर डाल सकती है। जिससे राज्य वार अर्ध सैनिक कल्याण बोर्डों की स्थापना की जा सके।
सरकार को सरहदी चौकीदारों की स्वास्थ्य देखभाल से कोई खास लेना देना नहीं। यहां जिला रोहतक हरियाणा का उदाहरण देना ही काफी है जहां तीन साल पहले सीजीएचएस डिस्पेंसरी खोलने हेतु आदेश दिए गए जो कि आज तक वेलनेस सेंटर नहीं खुल पाया। नारनौल,भिवानी, हिसार,सीकर,झुंझुनूं,कुल्लू, मंडी,हमीरपुर,बागेश्वर, अल्मोड़ा,पिथोरागढ,गाजीपुर बलिया आजमगढ़,भिंड मुरैना जहां पर बहुतायत संख्या में अर्धसैनिक बलों के परिवार निवास करते हैं सरकार को तत्काल प्रभाव से नई सी जी एच एस डिस्पेंसरियां खोलने की आवश्यकता है।





