सालभर बाद भी नहीं मिली मजदूरी
रामप्रवेश चौधरी (संपादक)
गरीबों को रोजगार मिले इसकेलिए सरकार की ओर से लागू की गई एकमात्र मनरेगा काम में भी काम करने के साल भर बाद नहीं मिल रहा मजदूरी।
सुंदरगढ़ जिला के राजगंगपुर प्रखंड अंतर्गत आनेवाले कुटिनिया पंचायत के गिरजा पाड़ा से काशी पाड़ा तक एक सड़क मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारी मजदूरों से बनवाई गई है। 10 लाख की लागत से यह काम सन 20 /21 में करवाई गई थी।
इस परियोजना में जिन मजदूरो ने काम किया था। उनका 100 दिन काम करने पर 50 दिन का ही पैसा मिला है, मजदूरों का कहना रहा कि बार- बार शिकायत करने के बाद भी एक साल बीत गए अभी तक हम गरीब मजदूरों का खाते में पैसा नहीं आया है इनकी शिकायत यह भी है कि सड़क का काम अधूरा कर पूरा पैसा बंदरबांट कर दी गई है,
मनरेगा की जगह ठीका में कराई जा रही काम 10/10/1फुट गहरा काम पर 1 मजदूर को 222 रुपये मिलता है।
इस विषय में पत्रकारों द्वारा प्रखंड़ विकास अधिकारी पीयूष लोहार से पूछने पर इन लोगो के बैक खाते से आधार कार्ड लिंक ना होने की बात कह रहे है।
यहाँ एक बहुत बड़ा प्रश्न उठता है कि यदि बैक खाता आधार कार्ड से लिंक नहीं होती तो 50 % पैसा कैसे दिया गया। कुल मिलाकर स्थानीय मजदूरों की शिकायत है कि मनरेगा काम में पूरी तरह बंदरबांट हो रही है। जहां 10 मजदूर काम कर रहे हैं वहां 50 मजदूरो के नाम से पैसा भेज कर आपस में बंदरबांट की जा रही है।
जिसकी शिकायत होने पर हमारे संवाददाता ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर खबर को संज्ञान में ली है कई जगह मनरेगा के माध्यम से तलाव भी खोदा जा रहा है सभी जगहो से गरीब मजदूरों की एक ही शिकायत है
अब देखना यह होगा की खबर प्रसारण के बाद उच्च अधिकारी मनरेगा काम को किस तरह से जांच करते हैं और मजदूरों का बकाया राशि भुगतान करते हैं
फिलहाल गरीब मजदूर मनरेगा में 1 साल पहले काम करके आज भी इंतजार में है कि हमारा पैसा हमारे खाते में कबतक आता है।
अब यहां प्रश्न उठता है कि देश के एक नंबर मुख्यमंत्री माननीय नवीन पटनायक के राज्य में गरीब मजदूरों का पैसा साल भर बाद भी ना मिलना इस पर कई सवाल उत्पन्न होती है ? जबकि सरकार की एकमात्र मनरेगा ही गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई है और इस संजीवनी को भी सरकारी महकमा डकार रही है मजदूरों द्वारा उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।





