विश्वासघात का शिकार आदिवासी परिवार टूटी झोपड़ी में कर रहें हैं गुजारा
सुंदगढ़ जिला में स्थित बिसरा पंचायत अंतर्गत आनेवाले बुदुलजोर के बडका टोली में सरकारी आवास योजना के तहत लाभार्थी को मिले रूपये स्थानीय सरपंच की मध्यस्था से ठग लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है ।
बुदुलजोर के बड़का टोली में रहने वाली केशरी मुंडा नामक एक महिला ने बताया कि वह अपने सास,ससुर पति और एक बेटी के साथ एक टुटी फुटी झोपड़ी में रहती है।
उसके सास ससुर इस झोपडी के एक कोने में 4-5 फीट की छोटी सी जगह में रहते है। इस समय उनका ससुर बिमार है और शैया से उठने बैठने में भी लाचार है। श्रीमती मुंडा़ ने बताया कि बरसात होने पर दूसरो के घर में शरण लेनी पड़ती है।

बीमार ससुर को ठीक तरीके से सुलाने लिए इनके पास ना तो कोई सुरक्षित जगह है और ना खाट। रसोई कार्य भी खुले में करना पड़ता है।
इस गाँव में केशरी मुंडा और उनकी सास को मिलाकर कुल चार लोगो के साथ इस तरह का बिश्वासघात होने की बात सामने आयी है।
इन लोगों का कहना है कि सरपंच के कहने पर उन्होने सरपंच पर भरोसा कर उनके समक्ष ही किसी ठेकेदार को सरकार से मिले रूपये खाते से निकालकर दे दिए।
जिसके बाद ठेकेदार द्वारा मकान बनाने के नाम पर सीर्फ गड्ढे खुदवाए गए जिसके बाद से ही ठेकेदार गदहे की सिंग की तरह गायब हो गया। सरपंच से बार बार शिकायत करने पर भी कोई लाभ नही हो रहा है।
अब सात महीने होने को है, केशरी मुंडा का परिवार अपनी टूटी फूटी झोपड़ी में पूरी ठंडी तो गुजार चुका है। अब आगे लू वाली गरमी, और उसके बाद आंधी तुफान और मूसलाधार बरसात अभी आनी है।क्या इतना कुछ झेल पायगी यह झोपड़ी यह बहुत बड़ा प्रश्न है।
बिसरा सरपंच के ऊपर पैसे गबन और विश्वासघात करने का यह पहला आरोप नहीं है ।

हमने स्थानीय सरपंच से मिलकर इस बारे में पूरी जानकारी लेनी चाही पर सरपंच अपने कार्यालय में अनुपस्थित थे। जिस वजह से उनसे खबर बनाए जाने तक कोई बात नहीं हो पाई।
यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जब सरपंच ने मकान बनवाने की जिम्मेदारी ली थी और सरपंच के कहने पर चार निरीह गरीब आदिवासीयों ने उसके बताए व्यक्ति को घर बनाने के लिए उनके समक्ष ही सरकार से मिले सारे रूपये दे दिए और अब सात महीने होने को आए घर बनाने के लिए अबतक एक ईट भी नहीं रखी गई तो क्या सरपंच को इसकी खबर नहीं लेनी चाहिए थी,क्या सरपंच को उनके पैसे लौटाने या घर बनाने के लिए उचीत कदम नहीं उठाना चाहिए था। कहीं इस हेराफेरी और विश्वासघात में सरपंच भी बराबर का हिस्सेदार तो नहीं है। यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।





