लोगों के लिए दुखों का कारण बना अर्ध निर्मित सेतु
हर्रैया तहसील मुख्यालय को कई गांवों से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग प्रान्तीय खंड बस्ती जिला,द्वारा मनोरमा नदी पर महेवा कुंवर और ज्ञानपुर के बीच एक लघु सेतु का निर्माण पिछले तीन चार सालों से किया जा रहा है, यह कार्य बहुत ही धीमी गती से चल रहा है,जिससे राहगीरों को काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इस अर्ध निर्मित पुल पर आए दिन दुर्घटनाएं घटित होना आम बात हो गई है।
जो लोगों के लिए जले पर नमक का काम कर रहीं हैं।
इस सेतु के बन जाने से बरगदवा, बसदेवा, इंदौली, कलानी, ज्ञानपुर, उमरिया गुप्तारसिंह, गौहनिया, नेपाल सिंह , मरवटिया, अमारी, अरजानीपुर, पखेरी , पूरे बेचू, अमीनडीह, आदी गांवो और अयोध्या जाने के लिए नदी के उत्तरी गांवों को एक एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाता।
परन्तु विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की शिथिलता से लोगों और पशुओं की जान पर बन आई है। स्थानीय किसान और पालतू पशूओं को नदी के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए रोजाना अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है।
नदी के इस पार से उसपर जानें के लिए पशूह और इंसान पानी में तैर कर अपना सफर पूरा करते है, या निर्माणाधीन पुल पर जोखिम उठाकर।
इससे स्कूल, कालेज ,जाने वाले छात्रों और वे किसान जिनका नदी के दोनों तरफ खेती है,रोजाना परेशानीयों का सामना कर रहे है। स्थानीय ग्रामीणों के बहुत आग्रह करने पर स्थानीय विधायक अजय सिंह द्वारा इस कार्य की स्वीकृति करायी गयी थी। किन्तु विभागीय लापरवाही और ठेकेदार के अड़ियल रवैये से यह केवल हाथी दांत साबित हो रहा है, और सिर्फ प्रदर्शन का सामान बनकर रह गया है। स्थानीय निवासी अरविन्द सिंह पुल पर अप्रोच न निर्माण होने के कारण अपनी गौवंश को पुल से उतारते समय हादसे का शिकार हो गये । जिससे उनका एक पैर टूट गया है, जिसकी शिकायत उन्होंने आन लाइन नंबर 1076 पर की थी। स्थानीय लोग बताते है कि इस अर्ध निर्मित सेतू पर इससे पहले भी कई लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं। यही नहीं स्थानीय किसानों के गौवंश,मवेशी और आवारा पशु जो किसी तरह पुल के ऊपर चढ़ गए थे। एक तरफ से चढ़कर दूसरे तरफ उतरने के क्रम में गिरकर अपने पैर तुड़वा चुके हैं। गांव के कई बालक पुलपर चढ़कर खेलने के क्रम में दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।जिसकी शिकायत शोसल साइट ट्वीटर पर और मौखिक रूप से संबंधित विभाग को किया गया था। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही साबित हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है ,विभाग सभी शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर अपनी कृत्यों को छुपा लेता है। स्थानीय लोग अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहते है कि, अब तो लोकनिर्माण विभाग स्वयं यशश्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देख रहें है। तब पर भी विभागीय लापरवाही और ठेकेदार का रवैया ठीक नहीं है। इसपर संबंधित विभाग के जेईई से जब वर्ज़न मांगा गया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए दूसरे जेईई से सम्पर्क करने तथा ठेकेदार से बात करने को कहा ।
यहां सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि हादसे पर हादसे होते जा रहें हैं, पर कोई भी समाधान की ओर ध्यान नही दे रहा है। ऐसा लगता है कि शायद विभाग और ठेकेदार किसी बड़ी दुर्घटना के घटित होने का बाट जोह रहे है। इसे भ्रष्टाचार की हद नहीं तो और क्या कहेगें कि । इस कार्य से संबंधित जानकारी जैसे, डिस्प्ले बोर्ड या रास्ता अवरूद्ध है का बोर्ड या कृपया इधर से न जाएं जैसे चेतावनी का बोर्ड कहीं पर भी लगा हुआ नहीं मिला।





