महात्मा गांधी और वो बड़े कान वाला नन्हा बच्चा
भारत के महान वो वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि पर उनको समर्पित,यह लेख
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)
महात्मा गांधी ने जब अहमदाबाद के पास अपना साबरमती आश्रम बनाया उसमें एक दलित व्यक्ति रहने आए उनका नाम दूदा भाई था उनके साथ में उनकी पत्नी दानी बेन और एक छोटी बच्ची भी थी। इन तीनों को गांधी जी ने आश्रम में जगह दी तो अहमदाबाद में हंगामा हो गया। लोगों ने जुलूस निकाला और गांधीजी के विरोध में नारे लगे। जो सवर्ण साबरमती आश्रम को चंदा देते थे उन्होंने चंदा देना बंद कर दिया। आश्रम बंद होने की नौबत आ गई। आसपास के लोगों ने दूधाभाई और उनके परिवार पर गालीयों की बौछार शुरू कर दी और दूदा भाई का जीना हराम कर दिया। लेकिन गांधी अपने फ़ैसले से टस से मस नहीं हुए।
आश्रम को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद होने लगी। गांधीजी की पत्नी कस्तूरबा ने गांधीजी से एतराज किया कि वे एक दलित के साथ नहीं रह सकतीं। यहां तक कि गांधी के भाई आश्रम छोड़कर जाने लगे।
*गांधीजी ने कस्तूरबा और अपने भाइयों को कहा कि यह आश्रम है इसमें सभी के लिये नियम समान हैं,इसमें दुधाभाई तो रहेंगे। आपको फैसला करना है आप आश्रम के नियम का पालन करते हुए रहेंगे या नहीं रहेंगे। आश्रम ठप होने की स्थिति में आ गया। गांधीजी के सहायकों ने उनसे कहा कि अब आश्रम में इतना भी धन नहीं है कि राशन पानी का खर्चा भी उठाया जा सके। क्या यह आश्रम बन्द कर दिया जाय? गांधीजी उदास होकर चटाई पर बैठे बैठे सोचने लगे कि अब क्या होगा? इतने में एक बच्चा दौड़ा दौड़ा आया कि एक सेठजी आपसे मिलना चाहते हैं। गांधीजी दरवाजे पर पहुंचे तो देखा कि कार में अहमदाबाद के करोड़पति सेठ अंबालाल साराभाई बैठे हुए हैं।*
अंबालाल साराभाई कार से उतरे ने गांधीजी को 15 हजार रुपये दिए और उन्होंने गांधी जी से कहा कि महात्मा जी आश्रम चलते रहना चाहिये। आपके आश्रम में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।
साराभाई परिवार की स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम भूमिका रही है। गुरुदेव रवींद्रनाथ, जे कृष्णमूर्ति, मोतीलाल नेहरू, वीएस श्रीनिवास शास्त्री, जवाहरलाल नेहरू,सरोजिनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सीएफ़ एंड्र्यूज, सीवी रमन आदि अहमदाबाद जाने पर साराभाई के यहां रुकते थे।
महात्मा गांधी भी अपनी बीमारी की हालत में एक बार इस परिवार के लंबे समय तक मेहमान रहे थे। अम्बालाल साराभाई के बड़े कान वाले बच्चे को भी महात्मा गांधी की बीमारी में सेवा करने का अवसर मिला। *गांधी जी ने उस बच्चे को देखकर कहा कि इसके कान तो बिल्कुल मेरे जैसे बड़े_बड़े हैं।* गांधी जी के आशीर्वाद से वह बच्चा आगे चलकर भारत का बहुत बड़ा अंतरिक्ष वैज्ञानिक बना। उस बच्चे का नाम था विक्रम साराभाई।
विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। डॉ॰ साराभाई एक स्वप्नद्रष्टा थे और उनमें कठोर परिश्रम की असाधारण क्षमता थी। फ्रांसीसी भौतिक वैज्ञानिक पी ए क्यूरी के अनुसार डॉ॰ साराभाई का उद्देश्य जीवन को स्वप्न बनाना और उस स्वप्न को वास्तविक रूप देना था। इसके अलावा डॉ॰ साराभाई ने अन्य अनेक लोगों को स्वप्न देखना और उस स्वप्न को वास्तविक बनाने के लिए काम करना सिखाया। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता इसका प्रमाण है।





