मलकानगिरी में ग्रामीणों ने 20 माओवादी स्मारक तोड़े
सतीश शर्मा (उपसंपादक)
ओडिशा में कभी माओवादी गढ़ माने जाने वाले मलकानगिरी जिले के कई दूरस्थ, अंदुरुनी गांवों के ग्रामीणों ने प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) द्वारा स्थापित 20 ‘नक्सल स्मारकों/’शहीद स्तंभ’
को ध्वस्त कर दिया। ये स्मारक पहले प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) द्वारा अपने मृत साथियों की याद में स्थापित किये गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि अब माओवादियों का प्रभाव काफी कम हो गया है और ये स्मारक उनके लिए अब किसी प्रेरणा का स्रोत नहीं रहे।
मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक विनोद पाटिल ने यह जानकारी दी।
एसपी ने बताया कि शेष स्मारकों को भी आने वाले दिनों में हटाए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मलकानगिरी को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने की पृष्ठभूमि में यह कदम जमीनी हकीकत में आए बदलाव का सकारात्मक संकेत है। यह शांति, विकास और प्रगति को संघर्ष और अलगाव पर प्राथमिकता देने की जनता की इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि ये स्मारक अब उनकी आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते। वर्षों तक उग्रवादी प्रभाव के कारण क्षेत्र में भय का माहौल रहा, बुनियादी सेवाएं बाधित हुईं और विकास कार्य ठप पड़े रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिला पुलिस और सिविल प्रशासन के समन्वित प्रयास—जैसे क्षेत्र प्रभुत्व अभियान, सामुदायिक पुलिसिंग, नागरिक कार्य योजनाएं और कल्याणकारी गतिविधियां—से उनका विश्वास मजबूत हुआ है। अब समुदाय शांति और स्थिरता के वातावरण में आगे बढ़ना चाहता है।
पुलिस और प्रशासन के प्रयासों से इलाके में माओवादियों का प्रभाव काफी घट गया है, और मलकानगिरि को नक्सल-मुक्त घोषित किये जाने के प्रयासों के बीच यह कदम शांति और विकास की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
ग्रामीणों द्वारा स्वयं यह कदम उठाना दर्शाता है कि वे शांति और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सुरक्षा रणनीति की सफलता
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियानों, सुरक्षा बलों की तैनाती और बुनियादी ढांचे के विकास ने माओवादियों की पकड़ को कमजोर किया है। सड़क और पुल निर्माण से दूरस्थ गांवों का संपर्क मुख्यधारा से बढ़ा है। इससे प्रशासन की पहुंच आसान हुई और लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि विकास की यह गति जारी रही, तो मलकानगिरि पूरी तरह नक्सल-मुक्त क्षेत्र के रूप में स्थापित हो सकता है।





