बसंती पुस्तकालय में मासिक साहित्य असर का आयोजन
प्रेस विज्ञप्ति :
राउरकेला शहर की प्रमुख साहित्यिक संस्था बसंती पुस्तकालय ने अपने मासिक साहित्यिक असर का आयोजन पुस्तकालय परिसर में किया है। पुस्तकालय के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं महासंपादक विक्रमचंद्र आचार्य के नेतृत्व एवं समन्वय में 'महाराजा कृष्णचंद्र गजपति नारायण देव एवं उत्कल गौरव मधुसूदन दास' जयंती' विषय पर चर्चा हुई। इसमें मुख्य आलोचक के रूप में डॉ. पंच कुमार मल्लिक और सम्माननीय आलोचक के रूप में प्रोफेसर करुणाकर पट्टशानी ने भाग लिया और दोनों महापुरुषों के संबंधों पर चर्चा की।
दोनों वक्ताओं ने अपने भाषणों में कहा कि कृष्णचंद्र गजपति नारायण देव मधुबाबू के पूर्ण पूरक थे। दोनों ही ओडिशा की अस्मिता की पहचान थीं। इन दोनों के नेतृत्व में उड़ीसा की अस्मिता और स्वाविमान ने भारत की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन की शुरुआत की। दोनों आलोचकों का मत था कि उत्कल प्रदेश के निर्माण में दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
द्वितीय चरण में कवि सुशांत कुमार नाइक एवं कोंकलता मिश्रा, लेखक व पत्रकार कुंजबिहारी राउत, शुभाश्री प्रियदर्शिनी जेना, विजयिनी जेना, अनीता दास, अजय मोहंती, गौतम दास, सुबासिनी साहू, ब्रजेंद्र दास, बबीता पटनायक के समन्वय में आयोजित कविता पाठ कार्यक्रम , त्रिनाथ सिंह, संजीव कुमार भोई, गंगाधर पुहान ने त्रिलोचन के लिए प्रमुख गीत कविता का पाठ किया। प्रारंभ में संस्थान के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री बेहरा ने स्वागत भाषण दिया तथा आवाहक श्री आचार्य ने अतिथियों का परिचय कराया तथा चर्चा किये गये विषयों की सामान्य जानकारी दी। अन्य लोगों में कमलाकांत मोहंती, सुमंत पति, दगंबर पाधी, सुरेंद्र साबत, शरत राउत, अमीर्या बेहरा, शशिरखा बेहरा, सुबास महापात्रा, वसंत महाराणा, पीठवास प्रधान, कृष्णचंद्र प्रधान, अशोक पटनायक, सुनील मोहंती, चितरंजन दास, दीप्तिखा बेहरा, निरुपमा शामिल हैं।
कविता दास, श्रीकांत मणिगराही, हरिहर शतपती, प्रकाशचंद्र पाढ़ी, गधर रथ, डॉ. सुबास लेंका, विभु भूषण दास, रवींद्र ठाकुर, संजय मिश्रा, उपस्थित थे। अंत में संपादक अजय प्रधान ने धन्यवाद अर्पण किया।





