नदियों की अनदेखी पर प्रशासन को अंतिम चेतावनी

 नदियों की अनदेखी पर प्रशासन को अंतिम चेतावनी

बस्ती नदियों के पुनर्जीवन को लेकर भूख-हड़ताल 5वें दिन भी जारी प्रशासन को अंतिम चेतावनी

बस्ती, 11 अप्रैल: जनपद की जीवनरेखा मानी जाने वाली मनोरमा, कुआनो और रामरेखा नदियों में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ चल रहा आंदोलन तेज हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ की भूख-हड़ताल शनिवार को 5वें दिन भी जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जारी रही। उनके समर्थकों का आज तांता लगा रहा ।सभी एक सुर से प्रशासन से आर पार को तैयार हैं। नदियां केवल जीवन धारा नहीं पीढ़ी गत सभ्यता की पहचान हैं।इसे मिटने नहीं दिया जायेगा।सुदामा ने कहा कि दूषित जल से न केवल पर्यावरण असंतुलित हो रहा है, बल्कि आमजन का स्वास्थ्य भी खतरे में है। उन्होंने प्रशासन पर अब तक कोई ठोस कार्ययोजना न देने का आरोप लगाया।

आज अवकाश के दिन धरना स्थल पर पहुंचीं नायब तहसीलदार, सदर बस्ती को एक मांगपत्र सौंपा गया। प्रमुख मांगों में नदियों की सफाई के लिए समयबद्ध व पारदर्शी कार्ययोजना, प्रदूषण नियंत्रण व गाद निकासी के लिए विभागवार जवाबदेही तय करना और निगरानी तंत्र बनाना शामिल है।
सुदामा ने कहा, “यह किसी व्यक्ति का नहीं, आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है। अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द लिखित कार्ययोजना देकर भूख-हड़ताल समाप्त नहीं कराई गई तो सोमवार से आंदोलन उग्र किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।धरने को देवशरण शुक्ल, दिग्विजय नाथ पाण्डेय, राजीव पाण्डेय, महेंद्र प्रताप सिंह, राहुल विश्वकर्मा, नरेंद्र देव उपाध्याय, राम धीरज चौधरी, नितेश शर्मा, महेंद्र चौहान, अजय चौहान, रणजीत यादव, गोविन्द गौड़, सूरज निषाद, पशुपतिनाथ चौबे, कन्हैया लाल तिवारी समेत कई लोगों ने समर्थन दिया।