दुरंतो एक्सप्रेस के राउरकेला में ठहराव को लेकर उठा प्रश्न

दुरंतो एक्सप्रेस के राउरकेला में ठहराव को लेकर उठा प्रश्न

राउरकेला रेलवे स्टेशन में दुरंतो एक्सप्रेस के ठहराव ना मिलने से क्षुब्ध कुछ समाजसेवीयों ने इसपर प्रश्न उठाया है और रेलवे के संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर इसके ठहराव की मांग की है। रेलवे अधिकारियों से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधि मंड़ल ने मीडिया के साथ अपनी बात साझा करते हुए कहा कि- 

राउरकेला के प्रति रेलवे का सौतेला व्यवहार कोई बहुत आश्चर्य की बात नहीं है परंतु जब अपना जोन ही अपने अधिनस्त स्टेशनों के प्रति बेरुखी प्रदर्शन करने लगें और दोहरा चरित्र दिखाने लगें तब कष्ट होता है। राउरकेला से गुजरने वाली 12221/22 हावड़ा पुणे दुरंतो तथा 12261/62 हावड़ा मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनल (सीएसटीएम) दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनें दक्षिण पूर्व रेल जोन की गाड़ियां हैं,परंतु अपने ही जोन अधिनस्त राउरकेला एवं संपूर्ण ओडिशा राज्य में बगैर किसी ठहराव के दक्षिण पूर्व केंद्रीय रेलवे अधिनस्त रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर के बाद द्वितीय ठहराव को देखते हुए तो ऐसा ही प्रतीत होता है। वह भी तब जब वर्ष 2019 में लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राउरकेला में इसके ठहराव को असुविधाजनक बताया तथा इसके कुछ ही महीनों के पश्चात उन्हीं कारणों के साथ रायपुर में ठहराव को रेल बोर्ड की स्वीकृति मिलना सांसद महोदय का,संसद का तथा ओडिशा के लोगों का सरासर अपमान है।

वर्ष 2009 में उपरोक्त दोनों ट्रेनों की घोषणा हुई तथा वर्ष 2015 में इसके सारे परिचालन ठहराव को पूर्णतः ठहराव दे दिया गया। जिसमें ओडिशा एक मात्र ऐसा राज्य रह गया, जिसके हाथ कुछ नहीं आया।ट्रेन के प्रारंभ होने वाले पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड, छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र को एक या इससे अधिक ठहराव मिले परंतु ओडिशा राज्य एक मात्र अपवाद रहा,यह रेलवे का ओडिशा और राउरकेला के प्रति सौतेला व्यवहार ही है।
शायद यही कारण है अक्सर राउरकेला और ओड़िशा के  दक्षिण पूर्व रेल के अधिनस्त स्टेशनों और क्षेत्रों को इस जोन से अलग कर इसका विलय ईस्ट कोस्ट रेलवे में करने की मांग उठती रही जो इन सभी कारणों से सही भी लगता है। रेलवे को इसपर शीघ्र ही निर्णय लेना होगा।
दक्षिण पूर्व रेलवे की दो और ट्रेनों 18181/82 टाटा थावे एवं  28181/82 टाटा कटिहार का भी यही हाल है। वर्ष 1998 का तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार का पत्र इस बात का सबूत है कि इन ट्रेनों के टाटा से राउरकेला सम्प्रसारण की मांग कम से कम 30/35 वर्ष पुरानी है परंतु अपने ही जोन अधिनस्त राउरकेला तक सम्प्रसारण की मांग पर दक्षिण पूर्व रेलवे कान में तेल डालकर बैठा है। उपरोक्त ट्रेनें 18181/82थावे टाटा थावे तथा 28181/82 कटिहार टाटा कटिहार लगभग 14 घंटे टाटा स्टेशन पर खड़ी रहती है। अगर इनका सम्प्रसारण टाटा से राउरकेला हो जाए तो इसके समय, रॉलिंग स्टोक का बेहतर इस्तेमाल होगा तथा इससे लोगों का एवं रेलवे दोनों का फायदा होगा। इस संदर्भ में उत्तर भारतीय समन्वय समिति का प्रतिनिधि मंडल ने राउरकेला स्टेशन मैनेजर के माध्यम से रेल मंत्री, अध्यक्ष ,रेलवे बोर्ड,को प्रेषित किया है।इस प्रतिनिधि मंडल में ओ.पी सिंह, शिव सागर राणा,हरिशंकर इत्यादि शामिल थे।