दिव्य गृहस्थ जीवन सम्मेलन

दिव्य गृहस्थ जीवन सम्मेलन

प्रेस विज्ञप्ति 
मृत्यु भय का कारण नहीं बल्कि विजय का कारण है,उक्त वाक्य पंडित बीरेंद्र कुमार पांडा ने 'दिव्य गृहस्थ जीवन' सम्मेलन के अवसर पर कहा है,उन्होने यह भी कहा कि यज्ञ करने वाले का घर कभी श्मशान नहीं होता।

सेक्टर 8 शिव मंदिर के प्रांगण में मंदिर समिति एवं आर्य समाज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में ओटीवी के सर्बे भबंतु सुखीना के प्रकाश पंडित श्री पंडा ने उपरोक्त उद्बोधन के साथ श्रद्धालुओं से कहा कि अपनी संस्कृति को भूलने वाले अपनी संस्कृति को कभी पूर्ण नहीं कर सकते। जिस घर में भोजन और भजन बांटा जाता है, वह घर कभी अलग नहीं होता।  यह सन्तानोत्पत्ति, सत्य, संवर्धित सत्य, असंवर्धित सत्य, भोग और साष्टांग प्रणाम के सम्बन्ध में भी सुन्दर है। श्री पंडा ने साष्टांग प्रणाम को अमूल्य संपत्ति बताते हुए कहा कि रोज सुबह उठकर ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।  इसी तरह दूसरे दिन छात्रों ने आपस में विचारों का आदान-प्रदान किया और व्यवहार और वाणी में निरंतरता, समय की पाबंदी, तैयारी, आत्म-विश्वास, अहंकार, संस्कृति, चरित्र निर्माण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राष्ट्र को नष्ट नहीं करना, प्रतिद्वंद्वी नहीं होना।उन्होंने प्रतिस्पर्धी होने का आह्वान किया।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने भाग लिया, वहीं कार्यक्रम का संचालन मंदिर समिति के सरबश्री त्रैलोक्य बेहरा, अशोक बेहरा, सत्यनारायण तांती, हरेकृष्ण पाढ़ी, विनय कुमार सिंह, उमेश शरण, रवि परिदा, बसंत नाइक, परमानंद बोदायक, बालकृष्ण मुनिहिगर, श्रीधर बेहरा, भगवान प्रधान उपस्थित थे और कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया।