दिलीप कुमार पात्र फुटबॉल के सच्चे प्रोत्साहक
शतिस शर्मा (वरिष्ठ खेल पत्रकार)
अधिकांश लोग बचपन और युवावस्था में बहुत कुछ करने के सपने देखते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ और सीमाएँ उनके सपनों को पूरा करने में बाधा बन जाती हैं। ऐसे में कई लोग हार न मानते हुए अपने अधूरे सपनों को दूसरों के माध्यम से साकार करने का प्रयास करते हैं। कोईड़ा क्षेत्र के दिलीप कुमार पात्र ऐसे ही लोगों का जीवंत उदाहरण हैं।
47 वर्षीय दिलीप कुमार पात्र स्वयं एक बड़े फुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अन्य बच्चों को उच्च स्तर का खिलाड़ी बनाने का संकल्प लेकर खुद को इस कार्य में समर्पित कर दिया।
कुछ वर्ष पहले तक यहाँ सनराइज स्पोर्ट्स क्लब की ओर से अखिल भारतीय स्तर का ‘बेनुधर नायक स्मृति फुटबॉल टूर्नामेंट’ आयोजित किया जाता था, जो आर्थिक समस्याओं के कारण अब बंद हो चुका है।
2008 में सक्रिय फुटबॉल से दूर होने के बाद भी दिलीप कुमार पात्र खेल से अलग नहीं हुए। फुटबॉल से जुड़े रहने और क्षेत्र के बच्चों को बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2012 में कोईड़ा फुटबॉल अकादमी की स्थापना की। इस पहल में समय-समय पर कुछ अन्य खेलप्रेमी भी सहयोग करते रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अकादमी का संचालन निरंतर जारी है।
वर्तमान में इस अकादमी में 8 से 16 वर्ष की आयु के लगभग 40 से 50 बच्चे बिना किसी शुल्क के नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण के साथ-साथ अकादमी द्वारा यथासंभव किट, जर्सी और आवश्यक खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। श्री पात्र कोई बड़े धनाढ्य व्यक्ति नहीं हैं, फिर भी उनका समर्पण और त्याग बच्चों के भविष्य को संवार रहा है।
उनका समर्पण अब कुछ हद तक फल भी दे रहा है। इस अकादमी से प्रशिक्षित कई खिलाड़ी अंडर-14 और अंडर-17 ओडिशा टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यह न केवल अकादमी के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे कोईड़ा क्षेत्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
हाल ही में जेएसडब्ल्यू (JSW) ने इस पहल में सहयोग का हाथ बढ़ाया है। जेएसडब्ल्यू ने एक प्रशिक्षक की नियुक्ति कर उसके खर्च की जिम्मेदारी ली है। खेल सुविधाओं को लेकर चर्चा करते हुए श्री पात्र कहते हैं, “कोईड़ा क्षेत्र में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यदि इन्हें सही अवसर मिले, तो ये निश्चित रूप से अच्छे परिणाम देंगे। यहाँ कई खनन कंपनियाँ कार्यरत हैं। यदि वे अपने सीएसआर (CSR) फंड का थोड़ा सा हिस्सा भी खेल विकास पर खर्च करें, तो इस क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में बड़ी मदद मिल सकती है। दुर्भाग्य से, इस दिशा में अभी तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।”
उन्होंने सरकार से भी अनुरोध किया है कि यहाँ एक फुटबॉल खेल छात्रावास की स्थापना की जाए, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधाएँ और अवसर मिल सकें और वे अपनी प्रतिभा का समुचित विकास कर सकें।
सीमित संसाधनों, निजी खर्च और सहयोगियों की सहायता से दिलीप कुमार पात्र निरंतर बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण देने में लगे हुए हैं। उनका विश्वास है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो कोईड़ा जैसे दूरदराज़ क्षेत्रों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर सकते हैं।
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