दिखावे की बस्तु बनकर रह गया यह पुल

सूंदरगढ़ जिला के नुआगांव प्रखंड़ अनतर्गत आनेवाले सोरडा़ और चीतापीडी पंचायत के सिमांत में स्थित कातेपुर ग्राम से होकर गुजरने वाली नदी जिसे स्थानीय भाषा में झरिया कहा जाता है। के ऊपर बनी यह पुल महज एक दिखावे की बस्तु बनकर रह गई है। यह पुल कब बनी, किसके द्वारा बनवाई गई, किसने इसकी स्विकृती प्रदान की थी। पुल की लागत कितनी थी और किस योजना के अन्तर्गत बनाई गई है। इसकी जानकारी से संबंधित सूचना पट्ट पुल के आसपास कही पर भी नजर नहीं आई। पुल की स्थिति और पुल के दोनों ओर ऊग आई झाडियों को देखकर ऐसा लगता है कि इस पुल को बने हुए एक अरसा बीत गया।  
फिरभी इस पुल को अबतक मुख्य मार्ग के साथ संयोग नहीं किया गया है। यह कार्य विभागीय उदासीनता और संबंधित अधिकारी की लापरवाही को साफ दर्सा रहा है। 
इस पुल के मुख्य सड़क से संयुक्त ना होने से लोग आज भी पुराने पुल का उपयोग करने के लिए विवस है। स्थानीय लोग बताते है कि बरसात के दिनों में पुराने पुल पर पानी भर जाता है। और आवागमन ठप हो जाती है या। जान हथेली पे लेकर पुल पार करना होता है। पानी भरे हुए पुल से वाहनों को पार करना काफी जोखिम भरा होता है। 
यह पुल इस बात को भी दरसाता है कि किस तरह नुआगांव प्रखंड में सरकारी पैसे का दुरूपयोग हो रहा है, और‌ संबंधित अधिकारीयों का ध्यान इस ओर ना जाना उनकी लापरवाही के किस्से बयां कर रहा है। या फिर कही ऐसा तो नहीं की अधिकारी जानबूझकर इसे अनदेखा कर रहे है। 
मामला कुछ भी हो सच्चाई क्या है, क्यों पुल के पूरी तरह से बन जाने पर भी मुख्य सड़क से संयुक्त नहीं हो सका। पुल से संबंधित सूचना पट्ट क्यों नहीं लगाई गई। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।