तो क्या मोहम्मद परवेज के खिलाफ कोई शाजिस रची गई थी

तो क्या मोहम्मद परवेज के खिलाफ कोई शाजिस रची गई थी

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार रक्षक कार्यकर्ता मोहम्मद परवेज की गिरफ्तारी को लेकर आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है। 
लाठीकटा थाना द्वारा दिनांक 10-01-2024 को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार रक्षक कार्यकर्ता मोहम्मद परवेज को एक ट्रक चालक की शिकायत पर डकैती के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 
इस मामले में पुलिस ने जब्त सामाग्री की सूची में इस बात का उल्लेख किया है कि ओडिशा सरकार की पास संख्या 0383458 जब्त किया गया है जो लाठीकटा तहसीदार द्वारा जारी किया गया है। पर जब लाठीकटा तहसीलदार से सूचना का अधिकार के तहत पुलिस द्वारा मोहम्मद परवेज के पास से जब्त की गई पास संख्या 0383458 की जानकारी मांगी गई तो पत्र संख्या 395 दिनांक 08-02-2024 में लाठीकटा तहसील कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा यह जबाब दिया गया है कि इस पास के संबंध में कार्यालय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। (मो.परवेज पर इसी पास को चालक से छीनने का आरोप है)

इनबातो से साफ जाहिर होता है कि मोहम्मद परवेज को लाठीकटा पुलिस की मिलीभगत से झूठे मुकदमें में फंसाया गया है।
मोहम्मद परवेज के वकील मोहम्मद इमरान और अमन राय ने सारांश दैनिक को जानकारी देते हुए यह बताया कि मोहम्मद परवेज को लाठीकटा थाना क्षेत्र से बालू के अवैध कारोबार की शिकायत मिलने पर वह मामले की हकीकत जानने के लिए वहाँ गया था और बालू लदा एक भारी वाहन क्रमांक ओडी 14 एक्स 0192 को रोककर उससे बालू लदान के बारे में पूछताछ की और चालक से टीपी दिखाने को कहा।चालक ने परवेज को जो टीपी दिखाई वह सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार फर्जी साबित हुई। 

मामला आईने की तरह साफ है कि एक ओर जहाँ बालू के इस अवैद्य कारोबार से सरकार को करोडो़ रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है, वही दूसरी ओर इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले पर झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाता है। इस पूरी कार्यवाही में पुलिस की भूमिका बहुत संदिग्ध नजर आ रही है। 
अब देखना यह है कि सच सामने आनेपर मोहम्मद परवेज पर झूठा मुकदमा बनाकर जेल भेजने वाले पुलिस कर्मचारी पर और पुलिस द्वारा जब्त की गई पास को सही बताने वाले दो गवाहों मारीयानुस आईंद ओर कलाकार माझी पर प्रशासन क्या कार्यवाही करती है।