जब अपने दो पिढी़यो से मिली 102 वर्षीय बृद्धा
*"जरूरत मंदो की मदद कीजिए,वाकई अच्छा लगता है, इंसानी जीवन की सार्थकता इसी में है.."*..श्रीमती जस्सी फिलिप
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)
कल्पना कीजिए अगर किसी के प्रयास से 102 साल की लापता बुजुर्ग महिला को उसकी दो पीढ़ियों से मिलने का अवसर मिला हो तो उस वक्त का माहौल कैसा रहा होगा ?
जी हां मैं स्वयं इस सुखद पल का साक्षी रहा हूं,मेरे लिए भी यह समय अविस्मरणीय बन गया है।।
मुझे बताया गया कि "कोरबा शहर से बस में बैठकर महलोई(पुसौर)निवासी अपने भतीजे_बहु,परिवार से मिलने निकली बुजुर्ग महिला इस भीषण गर्मी में दो दिनों तक रायगढ़ शहर में भटकते रही।। इस बीच वह रामपुर_सर्किट हाउस रोड में भूखी प्यासी बेसुध हो गई। उसे अचेत अवस्था में मृत्यु के बिल्कुल करीब आया देखकर उर्दना साई मंदिर से लौट रही श्रीमती नायर ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए, पहले बुजुर्ग महिला को घर ले आई।102 साल की महिला को नहला धुला कर कुछ खिला_पिलाया,इसके बाद जब वो बात करने योग्य स्थिति में आ गई तब श्रीमती नायर ने बुजुर्ग महिला के विषय में सु:विख्यात समाज सेविका श्रीमती जस्सी फिलिप और समाज कल्याण विभाग रायगढ़ को जानकारी दी।
जिसके बाद श्रीमती फिलिप के अथक प्रयास से बुजुर्ग महिला के परिजनों को खोजा गया,दूसरे दिन महलोई निवासी महिला के परिजन मिल गए और उनसे संपर्क करने के बाद,जब परिजन वृद्ध महिला को लेने *आशा प्रशामक देखभाल गृह* पहुंचे तो संस्था की संचालक श्रीमती फिलिप ने मीडिया और प्रशासन को इस बात की जानकारी देते हुए,विधिवत तरीके से 102 साल की स्वस्थ बुजुर्ग महिला को उनके परिजनों को सौंप दिया।।
इस समय फटहामुड़ा स्थित प्रशामक गृह का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया था। जब महिला के बाद की उसकी तीन पीढ़ियों ने उसे ससम्मान अपने घर लेकर जाने की तैयारी कर ली थी।।
तब वहां उपस्थिति हम सभी लोगों ने परिजनों और संस्था संचालक श्रीमती जस्सी फिलिप समेत बुजुर्ग महिला की सही समय पर उचित स्थान पर पहुंचाने वाली बड़े रामपुर निवासी भद्र और संवेदनशील महिला श्रीमती अंबिका नायर को शुभ कामनए दी।





