ग्रामीणों ने वारंट के बिरोध में किया थाने का घेराव
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
वारंट के विरोध में ग्रामीणों ने गोपालप्रसाद थाने का घेराव किया।
तालचेर की डअंरा ग्राम प्रबंधन समिति ने कोयला खदानों के लिए किराए पर लेकर सारी जमीन का अधिग्रहण करने की शिकायत स्थानीय प्रशासन और राजनेता से बार-बार करने पर भी उनकी किसी ने एक नहीं सुनी। इसलिए ग्रामीणो ने खनन बंद आंदोलन शुरू कर दिया।जिसे लेकर गोपाल प्रसाद थाने में ग्रामीणों के बिरूद्ध मामला दर्ज किया गया है। उन लोगों के नाम पर वारंट जारी होने के बाद ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए हिंगुला थाने का घेराव किया. घटना के अनुसार एमसीएल ने पहले ही दौरा गांव की 88 फीसदी जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। वे लंबे समय से शेष 12 फीसदी जमीन के अधिग्रहण की मांग कर रहा हैं। 2006 की आरपीडीसी बैठक के अनुसार, जिन गाँवों में एमसीएल ने 50% से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया है,उन गांवों में एमसीएल की ओर से बाकी बचे भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा और इस तरह गाँव के सौ प्रतिशत भूमी का अधिग्रहण कर पूरे गाँव को विस्थापित कर दिया जाएगा। लेकिन एमसीएल ने आज तक उक्त गांव के शेष 12% हिस्से का अधिग्रहण करने के लिए कदम नहीं उठाया है। जिला प्रशासन ने 1997 में कोचियानाली भूमि को एमसीएल को सौंप दिया। एल.ए. अधिनियम संख्या 99, 100, 101 के अनुसार परियोजना को 5 वर्ष तक पूरा करने का नियम है, लेकिन आज तक खनन कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। एमसीएल और जिला प्रशासन आपसी समझौते से राज्य सरकार द्वारा पुनर्वास के उद्देश्य से 2007 में कोचियानाली क्षेत्र का अधिग्रहण किया, लेकिन एल.ए. एक्ट और सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि जिस उद्देश्य के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उस भूमी पर किसी भी तरह से कोई दूसरा काम नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण बार-बार 1062 नामों की सूची सही करने की मांग कर रहे हैं। जिला कलेक्टर अनुगोल ने दिनांक 31/01/2023 को एमसीएल से प्रभावित तालचेर के सभी गांवों को बुलाया और उनकी मांगों को सुना। लेकिन ग्रामीणों ने खुलासा किया है कि इन तमाम शिकायतों के बाद भी ग्रामीणों की अनदेखी की गई है और कोई नतीजा नहीं निकला है।





