गर्मीयो के मौसम में जंगलो में क्यो लगती है आग

गर्मीयो के मौसम में जंगलो में क्यो लगती है आग

 ओडिशा का सुंदरगढ़ जिला वनो से आच्छादित जिला है, इस जिले के वन क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष गर्मीयों के मौसम में आग लगने की घटना मीडिया की सुर्खियां बनती है।
किंतु यह आग लगती कैसे है?

गर्मीयो के मौसम में महुआ के पेडो़ से फूल गिरते है। महुआ के फूल से स्थानीय लोगो को आर्थिक लाभ होता है और जिले भर के ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ के पेड़ बहुयात में है। 
महुआ के फूलो को चुनने के लिए पेड़ के नीचे सफाई की जाती है इसक्रम में पहले पेड़ के नीचे पड़े सूखे पत्तों में आग लगा दी जाती है,आग बुझने पर पानी छिड़क कर झाडू से पेड़ के नीचे चारो ओर कुछ दूर तक सफाई की जाती है कुछ लोग यहाँ गोबर भी लीपते है। 
जब महुआ के पेडो़ के नीचे पडे़ सूखे पत्तों में आग लगाई जाती है तो कई बार ऐसा होता है कि पतझड़ का मौसम होने के कारण यह आग धीरे धीरे सूखे पत्तों से होते हुए आसपास के सूखे झाड़ियों में फैलने लगता है।

जिन क्षेत्रो में आग की तपिश अधिक होती है उन क्षेत्रो के हरे भरे झाड़ और पेड़ भी इस आग की भेट चढ़ जाता है। 

कई बार स्थानीय लोग जंगल झाड़ियों की सफाई के लिए भी यह उपाय करते है ,कि सुखे पत्तो में आग लगाकर घर चले जाते है।ऐसा शाम के वक्त ही किया जाता है।
लोग महुआ पेड़ के नीचे या अन्य झाड़ियों की सफाई, खेतो में फसल काटने के बाद फसल के डंटलो की सफाई के लिए आग लगा देते है आग धीरे धीरे आसपास के सूखे पत्तो, झाड़ियों, को अपनी आगोश में लेता हुआ विस्तार होने लगता है और कभी कभी ऐसा भी होता है कि जंगल से सटे इलाकों में  यह आग इतना बिकराल रूप ले लेता है कि इसपर काबू पाना आसान नही होता। 
इस मौसम में अग्निशामक कर्मचारी भी इन सब वजहो से आग बुझाने में काफी व्यस्त रहते देखे जाते है।कुछ दिनो से बिसरा, नुआगाँव प्रखंड़ में भी आसमान पर धुआँ उठता देखा जा रहा है।

 ऐसे में आग लगाकर घर में जाकर चुपचाप सो जानेवाले लोगो को सतर्कता के साथ काम करने की जरूरत है ताकि जरूरत से ज्यादा आग का विस्तार ना होने पाए।