ग्रामीणों ने जमींन अधिग्रहण का किया विरोध
ऐसे समय में जब प्रशासन एक ओर लॉक-डाउन लगा रही है वहीँ दूसरी ओर एक बड़े जन समूह को प्रशासनिक अधिकारिओ द्वारा जनसुनवाई के नाम पर इकठ्ठा करना कहाँ तक उचित है
रामप्रवेश चौधरी ( संवाददाता )
राजगांगपुर : चुना पत्थर खदान के लिए जमींन अधिग्रहण का मामला अधर में लटका,ग्रामीणों ने जन सुनवाई का किया बहिस्कार,कुकुडा पंचायत से बैरंग लौटी जिला प्रशासन |
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सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर स्थित "डालमिया भारत सीमेंट लिमिटेड" के चुनापत्थर खदान के लिए जमीन अधिग्रहण मामले को लेकर पूर्व निर्धारित दो पंचायतों के निवासियों को लेकर होने वाली जनसुनवाई को आज स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी जमींन न देने कि बात कहते हुए जिला प्रशासन का विरोध कर जनसुनवाई को रद्द कर दिया | जनसुनवाई के लिए गाँव में आई सरकारी महकमा को बैरंग वापस लौटना पड़ा |
इस जनसुनवाई के लिए सब कलेक्टर स्थानीय तहसीलदार ,कंपनी के अधिकारीयों और 6 बटालियन पुलिस को साथ लेकर कुकुड़ा और खटाग पंचायत गई थी |
जब कि स्थानीय सरपंच द्वारा एक दिन पहले ही जिलापाल के समक्ष लिखित रूप से आवेदन दिया था कि जिले में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थिति सामान्य होने तक जनसुनवाई को स्थगित कर दिया जाए |
इसके बावजूद सरकारी अधिकारी कंपनी का पक्ष रखते हुए कंपनी के कहने पर कोरोना के गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए देखे गए जबकि दोनों पंचायत के स्थानीय लोगों ने सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध जताकर यह साबित कर दिया है की हम अपनी जमीन नहीं देंगे और जनसुनवाई के लिए आए अधिकारियों को गो बैक का नारा देकर आज की जन सुनवाई को पूरी तरह विफल किया |
राजगांगपुर स्थित एकमात्र सीमेंट संयंत्र "डालमिया भारत सीमेंट लिमिटेड" पिछले 70 सालों से सीमेंट का उत्पादन कर रही है | वर्तमान समय में जब जिला में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला-प्रशासन एक ओर लॉक-डाउन लगा रही है वही दूसरी ओर उपजिलापाल और तहसीलदार का पुलिस बल को साथ लेकर सैकड़ो कि तादात में जनसुनवाई के लिए लोंगों को इक्कठा करना कहाँ तक उचित है | क्या लॉक-डाउन और सोशल डिस्टेंस का पालन करना केवल जनता कि जिम्मेदारी बनती है ,क्या प्रशासनिक अधिकारीयों को कोरोना लों लेकर जारी किये गई दिशा-निर्देशों को पालन नहीं करना चाहिए |





