खान प्रबंधन के विरूद्ध एक विधवा का आंदोलन
अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)
नंदिरा कोयला खान के मुख्य द्वार पर महिलाओं का प्रदर्शन
ओडिशा के कोयलांचल तालचेर में नंदिरा भूमीगत कोयला खान में नचडा़ ग्राम के पादुका प्रधान कई बर्षो से काम करते थे ,सन् 2018 में उनकी मृत्यु हो गई।नियमानुसार पादुका प्रधान की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित के तहत उनकी पत्नी को नौकरी दी जानी चाहिए थी।
खान अधिकारियों ने स्थानीय विधायक के समक्ष स्वर्गीय प्रधान की पत्नी को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया था पर समय बीतता गया और फिर एक दिन खान प्रबंधन की ओर से उम्र का हवाला देते हुए यह कहकर नौकरी देने से मना कर दिया गया की आपकी उम्र 55 वर्ष हो गई जिसके कारण आप को नौकरी नही दिया जा सकता। जिस पर उक्त महिला का कहना है कि खान प्रबंधन की ओर से कहा गया था कि यदि मेडिकल बोर्ड से लिखित में लाया जाए तो नौकरी दी जा सकता है।
इसतरह खान प्रबंधन द्वारा विधवा को बारंबार टालमटोल किए जाने के कारण वाध्य होकर स्वर्गीय प्रधान की विधवा नंदिरा खान अधिकारियों के सम्मुख खान के मुख्य द्वार पर धरना देकर आन्दोलन करना पड़ा। फलस्वरूप खान में कार्यरत कर्मचारी मुख्य द्वार पार कर अंदर नही जा सके।
इस तरह उच्च अधिकारियों के गलत नीतियों के कारण बार बार धरना प्रदर्शन, हड़ताल होने से एमसीएल के अलावे राज्य एवं केन्द्र सरकार को मिलने वाली करोडो़ रुपये राजस्व की हानी होती है।
इस क्षेत्र में एमसीएल कर्मचारियों के हक के लिए कोयला खानो के मामले में पुलिस प्रशासन का चुप रह जाना विभिन्न महलो में कई प्रश्न खड़े कर रहा है।





