एनआईटी राउरकेला में जीएसटी सुधार एवं विकसित भारत दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय सम्मेलन
एनआईटी राउरकेला में 'जीएसटी 2.0 सुधार: विकसित भारत @2047 का दृष्टिकोण' पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
प्रेस विज्ञप्ति : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला
एनआईटी राउरकेला में 'जीएसटी 2.0 सुधार: विकसित भारत @2047 का दृष्टिकोण' पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
राउरकेला, 20 अगस्त 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) में आज “जीएसटी 2.0 सुधार: विकसित भारत @2047 का दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन एनआईटी राउरकेला के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है।
यह सम्मेलन शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, कर प्रशासकों, उद्योग पेशेवरों, शोधकर्ताओं और छात्रों को भारत के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बदलते ढांचे और 'विकसित भारत @2047' की दिशा में देश की आर्थिक व राजकोषीय यात्रा को आकार देने में इसकी भूमिका पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर लाता है। दो दिनों के दौरान होने वाले विचार-विमर्श में राजकोषीय संरचना, केंद्र-राज्य संबंध, राज्य राजस्व, एमएसएमई, प्रतिस्पर्धात्मकता, आर्थिक परिवर्तन, क्षेत्रीय प्रभाव, नवाचार, स्टार्टअप, अनुपालन और डिजिटलीकरण के दृष्टिकोण से जीएसटी सुधारों की समीक्षा की जाएगी।
उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी), नई दिल्ली की निदेशक प्रो. आर. कविता राव सम्मानित अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) के रूप में और जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राउरकेला आयुक्तालय, भुवनेश्वर ज़ोन के आयुक्त श्री वी. पांडिराजा, आईआरएस मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। एनआईटी राउरकेला के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीन) प्रो. राजीव कुमार पांडा और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रो. रोहन धीमान ने भी सभा को संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. जालंधर प्रधान ने की, जबकि डॉ. इप्सिता रॉय ने संयोजक और प्रो. नारायण सेठी ने सह-संयोजक के रूप में कार्य किया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, डॉ. इप्सिता रॉय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विभिन्न हितधारकों के लिए जीएसटी के अलग-अलग प्रभाव हैं—अर्थशास्त्रियों के लिए विकास और दक्षता से लेकर व्यवसायों के लिए अनुपालन और नकदी प्रवाह, सरकारों के लिए राजस्व व राजकोषीय संबंध, और नागरिकों के लिए दैनिक उपभोग तक। उन्होंने जीएसटी के भविष्य पर सार्थक चर्चा विकसित करने के लिए अकादमिक और व्यावहारिक दृष्टिकोणों को एक साथ लाने के महत्व पर जोर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए, प्रो. जालंधर प्रधान ने जनसांख्यिकी दृष्टिकोण से जीएसटी सुधारों की समीक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की बदलती जनसंख्या संरचना, विशेष रूप से बुजुर्ग आबादी में वृद्धि और स्वास्थ्य सेवा, पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा पर इसके प्रभाव से सार्वजनिक वित्त पर नई माँगें बढ़ेंगी।
प्रो. राजीव कुमार पांडा ने 'विकसित भारत @2047' को एक तकनीकी रूप से लचिले, आर्थिक रूप से टिकाऊ और सामाजिक रूप से समावेशी भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि जहाँ जीएसटी 1.0 ने भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को एकीकृत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया था, वहीं जीएसटी 2.0 प्रणाली को और सरल बनाने, अनुपालन को मजबूत करने तथा उभरती चुनौतियों और अवसरों का समाधान करने का अवसर प्रदान करता है।
एनआईटी राउरकेला के कुलसचिव प्रो. रोहन धीमान ने संस्थागत प्रशासन और अनुपालन के लिए जीएसटी सुधारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाओं में भाग लेने से संकाय (फैकल्टी), अधिकारियों और कर्मचारियों को विकसित हो रहे सुधारों की अपनी समझ बढ़ाने और ज्ञान के प्रसार को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
अपने सम्मानित अतिथि संबोधन में, प्रो. आर. कविता राव ने 2047 की ओर भारत की यात्रा में जीएसटी सुधारों की भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने भविष्य की विकासात्मक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सरकारों, विशेष रूप से राज्य सरकारों को आवश्यक संसाधनों का विश्लेषण करने और यह समझने की आवश्यकता पर बल दिया कि जीएसटी सुधार अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को कैसे प्रभावित करते हैं।
एक व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, वी. पांडिराजा, आईआरएस ने इस बात पर जोर दिया कि कराधान का भविष्य प्रौद्योगिकी, डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा गवर्नेंस और संस्थागत नवाचार से निकटता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जीएसटी प्रशासन की भूमिका को वैध व्यवसायों को सुविधाजनक बनाने, समान अवसर सुनिश्चित करने, कर चोरी को रोकने, स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने और एक ऐसा वातावरण बनाने के रूप में वर्णित किया जिसमें ईमानदार करदाता आत्मविश्वास के साथ नियमों का पालन कर सकें।
सम्मेलन विशेषज्ञों के सत्रों और पैनल चर्चाओं के साथ जारी रहेगा, जिसमें जीएसटी संरचना और आर्थिक परिवर्तन, जीएसटी और बाजार, फर्म-स्तरीय दृष्टिकोण, राज्य और क्षेत्रीय प्रभाव, नवाचार व स्टार्टअप, और जीएसटी अनुपालन, डिजिटलीकरण तथा एमएसएमई जैसे विषय शामिल हैं। इस दो दिवसीय विचार-विमर्श का उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, कर प्रशासकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के बीच सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देना है, जिससे जीएसटी के भविष्य और एक मजबूत व अधिक समावेशी भारत के निर्माण में इसकी भूमिका पर चल रही चर्चा में योगदान दिया जा सके।





