एएसआई की 43वीं वार्षिक बैठक एनआइटी राउरकेला में
प्रेस विज्ञप्ति:राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, "राउरकेला"
भारतीय ज्योतिर्विज्ञान परिषद (एएसआई) की 43वीं वार्षिक बैठक का उद्घाटन एनआईटी राउरकेला में किया गया
दिनांक 16 फरवरी 2025 को भारतीय ज्योतिर्विज्ञान परिषद (एएसआई) की 43वीं वार्षिक सभा आज औपचारिक रूप से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला में लगभग 400 भारतीय खगोलविदों के साथ शुरू हुई। सभा का उद्घाटन 16 फरवरी को सुबह 9:15 बजे भुवनेश्वर बेहरा ऑडिटोरियम में हुआ। समारोह के दौरान एएसआई द्वारा देश में खगोल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने वाले छात्रों, वैज्ञानिकों और नागरिकों को पहचान और सम्मान देते हुए कई पुरस्कार प्रदान किए गए। युवा खगोलविदों के लिए 15 फरवरी को आगामी स्क्वायर किलोमीटर अरे (एसकेए), एक अंतर-सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेगाप्रोजेक्ट, पर केंद्रित दो कार्यशालाएँ आयोजित की गईं थी।
उद्घाटन बैठक की शुरुआत स्थानीय आयोजन समिति के संयोजक प्रो. अनंता चरण प्रधान के स्वागत भाषण के साथ हुई। इसके बाद एएसआई की सचिव प्रो. सरिता विग ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के दौरान, एनआईटीआर के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति प्रकाश कर ने विभाग की उपलब्धियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उद्घाटन के दौरान मुख्य अतिथि एवं एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कर जैसे भारतीय गणितज्ञों के प्राचीन योगदान से लेकर इसरो के अंतरिक्ष मिशनों जैसी आधुनिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राउरकेला में प्रतिभागियों का स्वागत किया और उनके लिए सम्मेलन के उपयोगी होने की कामना की।
एएसआई के अध्यक्ष और आईआईएसटी तिरुवनंतपुरम के निदेशक प्रो. दिपांकर बनर्जी ने अध्यक्षीय भाषण दिया, जिसमें उन्होंने हाल के वर्षों में एएसआई की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने एएसआई के व्यापक “विजन दस्तावेज” पर प्रकाश डाला, जिसे पूरे भारतीय खगोल विज्ञान समुदाय द्वारा व्यापक और समावेशी तरीके से तैयार किया गया है। विजन दस्तावेज भारत में खगोल विज्ञान की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है और प्रमुख शोध प्रश्नों के संदर्भ में खगोल विज्ञान की सभी शाखाओं में वैश्विक पृष्ठभूमि के सापेक्ष भारतीय अनुसंधान और विकास के भविष्य का मार्ग दर्शाता है। प्रो. बनर्जी ने सभा में स्नातक छात्रों और युवा खगोलविदों की भागीदारी से विशेष रूप से हर्ष प्रकट किया।
भारत में एक्स-रे किरणों के खगोल विज्ञान के अग्रदूतों में से एक, प्रो. प्रह्लाद सी. अग्रवाल (टीआईएफआर, मुंबई से सेवा निवृत्त) को एएसआई गोविंद स्वरूप लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रो. अग्रवाल एक प्रख्यात खगोलशास्त्री हैं जिन्होंने भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट मिशन की शुरुआत की थी। एक दृढ़ सलाहकार भूमिका और प्रभावी शासन रणनीतियों के साथ, उन्होंने भारत में सबसे बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पुरस्कार वितरण के दौरान उनके दशकों की शोध यात्रा पर एक लघु फिल्म दिखाई गई। प्रो. एम. के. वेणु बापू स्वर्ण पदक उन युवा वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस वर्ष यह पदक आयुका, पुणे के डॉ. अनुपम भारद्वाज और टीआईएफआर के डॉ. जो पी. नीनन को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। आईआईएससी, बेंगलुरु के प्रो. निरुपम रॉय को आकाशगंगाओं और रेडियो खगोल विज्ञान पर उनके उत्कृष्ट शोध के लिए एएसआई लक्ष्मीनारायण और नागलक्ष्मी मोदाली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खगोल विज्ञान में जनसंपर्क और शिक्षा के लिए एएसआई जुबिन केम्भवी पुरस्कार डॉ. बी. एस. शैलजा को दिया गया। उत्कृष्ट पीएचडी थीसिस के लिए जस्टिस वी.जी. ओक पुरस्कार डॉ. देवोज्योति कंसबानिक और डॉ. आदित्य विजयकुमार को संयुक्त रूप से दिया गया तथा डॉ. डिंपल और डॉ. नमिता उप्पल को सम्मानपूर्वक उल्लेखित किया गया। एएसआई एस्ट्रोसैट पुरस्कार सुश्री शिप्रा होता को दिया गया तथा डॉ. दिव्या पांडे और श्री जुधाजीत बसु को सम्मानपूर्वक उल्लेखित किया गया। सर्वश्रेष्ठ प्रकाशन के लिए युवा खगोलशास्त्री पुरस्कार डॉ. सिंधु सत्यवोलू को दिया गया तथा श्री कोशवेंद्र सिंह और श्री सौविक जना को सम्मानपूर्वक उल्लेखित किया गया। बैठक का समापन प्रो. अभय प्रताप यादव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में 17 भारतीय राज्यों और 17 देशों के 112 संस्थानों से 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें 29 विदेशी संस्थानों, 37 भारतीय अनुसंधान संस्थानों और 46 विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जो इस प्रतिष्ठित आयोजन में व्यापक और विविध भागीदारी को दर्शाता है।
दिन के दौरान खगोलविदों ने खगोल विज्ञान के विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक चर्चाएँ भी कीं। पुरस्कार विजेताओं ने अपने कार्यों का वर्णन करते हुए पुरस्कार व्याख्यान भी प्रस्तुत किए। दोपहर में, छात्रों ने टेलिस्कोप के माध्यम से सूर्य पर काले धब्बे, जिन्हें सौर धब्बे कहा जाता है, देखे और प्रो. दिपांकर बनर्जी द्वारा दिए गए लोकप्रिय व्याख्यान के माध्यम से सूर्य और आदित्य-एल 1 अंतरिक्ष मिशन के बारे में अधिक जानकारी पाई।
1972 में स्थापित भारतीय ज्योतिर्विज्ञान परिषद (एएसआई) भारत में पेशेवर खगोलविदों का प्रमुख संघ है, जिसमें करीब 1000 सदस्य हैं। एएसआई खगोल विज्ञान व खगोल भौतिकी और विज्ञान की अन्य संबंधित शाखाओं में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देता है। यह वैज्ञानिक बैठकें आयोजित करता है और छात्रों और समाज के बीच खगोल विज्ञान की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए जनसंपर्क गतिविधियाँ भी आयोजित करता है।





