इंदु राय को बचाने में जुटा खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा
पहली बार भ्रष्टाचार का ऐसा मामला देखने को मिल रहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा एक छात्रा का दसवीं पास होने का प्रमाणपत्र जारी किया गया है, और जिस स्कूल से 30 वर्षीय छात्रा ने दसवीं की पढ़ाई करके सरकारी अध्यापिका की नौकरी कर रही है वह स्कूल लाख ढूंढ़ने पर भी नही मिला। और यह चमत्कार हुआ है बिसरा प्रखंड़ के खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय में।
पहली बार ऐसा मामला देखने को मिल रहा है कि एक अध्यापिका एक ऐसे स्कूल से दसवीं पास होकर आती है जो अदृश्य है, जो स्कूल खंड़ शिक्षा अधिकारी द्वारा ढूंढने पर भी नही मिला, और जब बात खुली तो खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इस प्रमाण पत्र की जांच किया गया है ।
इन दिनों कुछ ऐसा ही चमत्कार कर रहा है,बिसरा का खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय।
खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सूचना का अधिकार के तहत पत्र संख्या 749 ,दिनांक 16-03-2024 में यह सूचना दी गई है कि इंदुराय के प्रमाण पत्रों की छायाप्रती जाँच के लिए भेजी गई है।
ऐसे में यह प्रश्न उठाना लाज़मी है कि एक दसवीं पास होने का प्रमाण पत्र एक विश्वविद्यालय द्वारा कैसे जारी किया गया है।
इतना ही नहीं बिसरा खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इसकी पुष्टि सूचना का अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई खत संख्या 2632,दिनांक 14-12-2023 में की जा चुकी है, कि इंदु राय द्वारा प्रेषित प्रमाण पत्र जिस कल्पतरू वाणी विहार संस्कृत विद्यालय बसंती कालोनी से जारी किया गया बताया जा रहा है, वास्तव में वह स्कूल है ही नहीं।

खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा द्वारा जिस अध्यापिका इंदुराय को बचाने की कोशिश की जा रही है वह कोई और नहीं बल्कि फर्जी प्रमाण पत्र प्रकरण मामले की बहुचर्चित अध्यापिका सरकारी हिंदी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाली इंदु राय ही है।
पूरा मामला यह बताने के लिए पर्याप्त है कि खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा में किस कदर भ्रष्टाचार व्याप्त है।
इस मामले में विरमित्रापुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक शंकर ओराम ने सामाचार एजेंसी सारांश न्यूज नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में भी इस बात का खुलासा किया था कि इंदु राय फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर सरकारी अध्यापिका बनी हुई है, उन्होने यह भी कहा था कि जिला शिक्षा अधिकारी को इसके जाँच का आदेश दिया गया है। लेकिन ऐसा लगता है कि बिसरा खंड़ विकास अधिकारी कार्यालय को जिला शिक्षा अधिकारी और विधायक का जरा भी खौफ नहीं है।
आपको बता दें कि बिसरा प्रखंड़ विरमित्रापुर विधानसभा क्षेत्र में आता है। अब देखना यह है कि नव निर्वाचित विधायक रोहित जोसेफ तिर्की इस मामले में क्या कार्यवाही करते है।





