हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी को अलविदा कहा
सतीश शर्मा (उप संपादक)
भारत की महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप विजेता कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा है। वह खिलाड़ी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करती रहेंगी। उनके शब्दों में, अब वह कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त होकर “खेल के प्रति अपने प्रेम” के लिए मैदान पर उतरना चाहती हैं। 37 वर्षीय हरमनप्रीत का फैसला अचानक जरूर दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे पिछले कुछ महीनों का प्रदर्शन, टीम की दिशा को लेकर समीक्षा और कप्तानी के लंबे दौर से जुड़ा दबाव भी नजर आता है। गुवाहाटी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने यह घोषणा की। बैठक की अध्यक्षता बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने की। इसमें हरमनप्रीत के साथ उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार भी मौजूद थे।
कप्तानी छोड़ना आसान फैसला नहीं
हरमनप्रीत ने अपने भावुक संदेश में स्वीकार किया कि कप्तानी छोड़ना उनके लिए आसान निर्णय नहीं था। उन्होंने कहा कि इस पद के साथ वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे क्षण जुड़े हैं, जो जीवनभर उनके साथ रहेंगे। उन्होंने कप्तानी के दौरान टीम के हित को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखने की बात कही। कई मौकों पर उन्हें अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं, व्यक्तिगत प्रदर्शन और खेल में अपनी प्रगति तक को पीछे रखना पड़ा, क्योंकि उनके लिए टीम सबसे पहले थी।
यही उनकी कप्तानी की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक रही। एक दशक तक भारतीय टी20 टीम का नेतृत्व करने वाली हरमनप्रीत ने महिला क्रिकेट के बदलते दौर को नजदीक से देखा और उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2016 में शुरू हुआ कप्तानी का सफर
हरमनप्रीत ने 2016 में भारतीय महिला टी20 टीम की कप्तानी संभाली। इसके बाद 2022 में उन्हें वनडे टीम की कमान सौंपी गई और 2023 में वह तीनों प्रारूपों की कप्तान बन गईं।
इस लंबे सफर में उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दिलाईं। उनकी कप्तानी का सबसे बड़ा पड़ाव पिछले वर्ष आया, जब भारत ने पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लंबे संघर्ष और विकास का प्रतीक भी थी। विश्व कप जीत ने टीम को नई पहचान दी और देश में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को और मजबूत किया।
विश्व कप जीत बनी कप्तानी की सबसे बड़ी उपलब्धि
भारत की महिला टीम लंबे समय से विश्व कप जीतने की कोशिश कर रही थी। कई बार टीम अंतिम चरण तक पहुंची, लेकिन खिताब उससे दूर रहा। हरमनप्रीत के नेतृत्व में आखिरकार भारत ने यह इंतजार खत्म किया। एक कप्तान के रूप में यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। विश्व कप जीत ने उनके नेतृत्व को भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में स्थायी स्थान दिया।
इसके अलावा उनकी कप्तानी में भारत ने एशियाई खेलों में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया।
कप्तानी का आंकड़ा भी प्रभावशाली
हरमनप्रीत ने भारत की कप्तानी पांच टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में की। विशेष रूप से टी20 क्रिकेट में उनका नेतृत्व लंबे समय तक चला।
2016 से 2026 तक लगभग एक दशक तक टी20 टीम की कप्तानी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इस दौरान महिला क्रिकेट में तेज बदलाव आया। घरेलू क्रिकेट से लेकर फ्रेंचाइजी लीग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक महिला खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिलने लगे। हरमनप्रीत इस परिवर्तन की प्रमुख भारतीय खिलाड़ियों में रही हैं।
आलोचनाओं का दौर भी आया
हर सफल कप्तान की तरह हरमनप्रीत को भी कठिन दौर का सामना करना पड़ा। पिछले कुछ समय में उनके बल्ले से अपेक्षित प्रदर्शन नहीं आया, खासकर टी20 प्रारूप में। इसी बीच भारत के टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाने से उनकी कप्तानी को लेकर आलोचना तेज हुई।
पूर्व खिलाड़ियों के एक वर्ग ने भी नेतृत्व में बदलाव की आवश्यकता जताई। पूर्व भारतीय कप्तान डायना एडुल्जी ने स्मृति मंधाना को कप्तानी सौंपने की वकालत की थी।
इससे हरमनप्रीत पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक था। कप्तान के रूप में खराब व्यक्तिगत फॉर्म का असर अक्सर खिलाड़ी की भूमिका से कहीं ज्यादा बड़ा माना जाता है। कप्तान से टीम के परिणाम के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रदर्शन की भी अपेक्षा की जाती है।
आलोचना के बीच भी टीम पर भरोसा
इन आलोचनाओं के बावजूद हरमनप्रीत ने अपनी विदाई में भारतीय टीम के भविष्य को लेकर सकारात्मक विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टीम इस समय प्रतिभा, चरित्र और आत्मविश्वास से भरपूर है और उसका भविष्य उन्हें उत्साहित करता है। यह संदेश इस बात का संकेत भी है कि वह कप्तानी छोड़ते समय किसी विवाद या कटुता के साथ नहीं, बल्कि संतोष के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह कप्तानी “भावनाओं से भरे दिल” लेकिन “मन की शांति” के साथ छोड़ रही हैं।
अब खिलाड़ी के रूप में नई भूमिका
कप्तानी समाप्त होने के बावजूद हरमनप्रीत का अंतरराष्ट्रीय करियर जारी रहेगा। उन्होंने साफ किया है कि वह भारत के लिए तीनों प्रारूपों में खेलती रहेंगी।
यह उनके करियर का एक नया चरण होगा। अब उन्हें कप्तान के रूप में टीम के परिणाम की जिम्मेदारी नहीं उठानी होगी। इससे वह अपने बल्लेबाजी प्रदर्शन और व्यक्तिगत खेल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। एक वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। मैदान पर नेतृत्व की औपचारिक जिम्मेदारी भले ही किसी और को मिले, लेकिन ड्रेसिंग रूम में हरमनप्रीत का अनुभव टीम के लिए उपयोगी बना रहेगा।
अगला कप्तान कौन?
हरमनप्रीत के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नए कप्तान को लेकर है। मौजूदा उपकप्तान स्मृति मंधाना का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे आगे माना जा सकता है, हालांकि अंतिम फैसला बीसीसीआई और टीम प्रबंधन को करना होगा।
नए कप्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्व कप विजेता टीम की सफलता को आगे ले जाने की होगी। साथ ही युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करना और टीम में निरंतरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
एक कप्तान का योगदान, एक खिलाड़ी की नई शुरुआत
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी को केवल जीत और हार के आंकड़ों से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने ऐसे दौर में भारतीय महिला क्रिकेट का नेतृत्व किया जब खेल तेजी से पेशेवर और प्रतिस्पर्धी बन रहा था। उनकी कप्तानी में भारत ने विश्व कप जीता, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किए और महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। दूसरी ओर, उनके कार्यकाल में कठिन दौर, आलोचना और व्यक्तिगत फॉर्म से जुड़ी चुनौतियां भी आईं। लेकिन किसी भी लंबे नेतृत्व की तरह उनकी विरासत इन दोनों पहलुओं का मिश्रण होगी।
कप्तानी छोड़ते समय हरमनप्रीत का संदेश स्पष्ट है—कप्तान का अध्याय समाप्त हुआ है, लेकिन खिलाड़ी की कहानी अभी बाकी है। अब वह टीम की कप्तान नहीं होंगी, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए उनका जुनून बरकरार रहेगा। विश्व कप विजेता कप्तान के रूप में उनका नाम इतिहास में दर्ज हो चुका है। आगे उनकी चुनौती होगी कि वह बिना कप्तानी के दबाव के अपने खेल को फिर से नई ऊंचाई दें और भारतीय टीम को एक वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में अपना अनुभव प्रदान करती रहें।





