स्वर्णपदक बिजेता सुनेलिता टोप्पो का गृह क्षेत्र में भव्य स्वागत

सुंदरगढ़ जिले के राजगांगपुर ब्लाक में स्थित छोटे से गांव कुकुड़ा की बेटी सुनेलिता टोप्पो ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑडिश और भारत का नाम रौशन किया है। एशियन गेम्स में हाकी के "मैदन पर स्वर्ण पदक जीतकर सुनेलिता ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता से परिवार के साथ साथ पूरे सुंदरगढ़ और ओडिशा में गर्व और खुशी का माहौल है। आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले के एक छोटे से गांव  से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने बाली सुनेलिता का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। उनके पिता छोटे व्यवसायी है। और माता गृहणी है।

सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी और हमेशा उसका हौसला बढ़ाया। परिवार के संघर्ष और सुनेलिता की कड़ी मेहनत का परिणाम अब पूरी दुनिया के सामने है। उनकी ऐतिहासिक सफलता के बाद कुकुड़ा गांव में उत्सव जैसा माहौल है।सुनेलिवा की सफलता से कुकुडा गांव के लोगों में है खुशी के साथ साथ गर्व का माहौल है। ग्रामीण अपनी इस 'सुनहरी बेटी' की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उसके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। देशभर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं मिल रही हैं। स्थानीय

लोगों के अनुसार, सुनेलिता बचपन से ही खेलों में प्रतिभाशाली थीं। हॉकी की शुरुआत के समय से ही उनके खेल में निखार दिखाई देने लगा था। खेल के साथ साथ पढ़ाई में भी वह अच्छी थीं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अपने लक्ष्य की और लगातार आगे बढ़ती रहीं। उनकी सफलता अब गांव की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है और यह संदेश देती है कि प्रतिभा, मेहनत और परिवार के सहयोग  से सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।