सौर ऊर्जा संयंत्रों की निगरानी एवं सफाई के लिए स्वचालित प्रणाली विकसित

सौर ऊर्जा संयंत्रों की निगरानी एवं सफाई के लिए स्वचालित प्रणाली विकसित

प्रेस विज्ञप्ति: राउरकेला प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) 

एनआईटी राउरकेला ने सौर ऊर्जा संयंत्रों (सोलर प्लांट) की निगरानी एवं सफाई के लिए स्वचालित प्रणाली विकसित की

विकसित प्रणाली स्वचालित रूप से सफाई की आवश्यकता वाले सौर पैनलों की पहचान करने तथा केवल प्रभावित हिस्से की ही सफाई करने में सक्षम है।

राउरकेला, 24 जुलाई 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) के नवप्रवर्तकों शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एक स्वायत्त प्रणाली विकसित की है, जो सौर ऊर्जा संयंत्रों (सोलर प्लांट) की निगरानी और सफाई करने में सक्षम है। यह नवाचार नियमित मानवीय हस्तक्षेप के बिना सौर पैनलों को स्वच्छ बनाए रखने तथा अधिकतम विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने की चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

इस प्रणाली का विकास एनआईटी राउरकेला के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर, प्रो. अरुण कुमार ने प्रो. बिभूदत्त साहू तथा शोध स्नातकों डॉ. लोपामुद्रा होता और डॉ. बिरजा प्रसाद नायक के सहयोग से किया है। शोध दल ने "फ़ेडरेटेड लर्निंग बेस्ड ऑटोनोमस सिस्टम एंड मेथड फॉर मॉनिटरिंग एंड क्लीनिंग सोलर प्लांट" शीर्षक से एक भारतीय पेटेंट भी प्राप्त किया है (आवेदन संख्या: 202531124513 तथा पेटेंट संख्या: 595979)।

भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में विशेषकर शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में स्थित बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में पैनलों पर धूल, पक्षियों की बीट, औद्योगिक प्रदूषकों तथा अन्य अवशेषों के जमाव जैसे कारणो से ऊर्जा उत्पादन में 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। वर्तमान में सौर पैनलों की सफाई के लिए अपनाई जाने वाली पारंपरिक विधियाँ श्रम-प्रधान होने के साथ-साथ अत्यधिक जल की आवश्यकता रखती हैं। इसके अतिरिक्त, इनका आधार पैनलों की वास्तविक स्थिति के बजाय पूर्व-निर्धारित रखरखाव कार्यक्रम होता है।

इन सीमाओं को दूर करने के लिए एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने फेडरेटेड लर्निंग आधारित एक स्वचालित प्रणाली विकसित की है। यह एआई-संचालित प्रणाली सौर पैनलों की खराबियों का पता लगाती है और आवश्यकता के अनुसार सफाई करती है। इस तकनीक का सत्यापन सिमुलेशन के माध्यम से किया जा चुका है और वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Level – 3) पर है, जो नियंत्रित प्रायोगिक परिस्थितियों में इसकी अवधारणा के सफल प्रमाण (Proof of Concept) को दर्शाता है। इस नवाचार की एक प्रमुख विशेषता इसकी गोपनीयता-संरक्षित फेडरेटेड लर्निंग संरचना है। पारंपरिक एआई प्रणालियों के विपरीत, जो प्राथमिक डेटा को केंद्रीकृत सर्वर पर साझा करती हैं, यह प्रणाली केवल एन्क्रिप्टेड डेटा साझा करती है। इससे गोपनीयता, बैंडविड्थ, साइबर सुरक्षा तथा विस्तार-क्षमता से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान मिलता है।

विकसित तकनीक के बारे में बताते हुए एनआईटी राउरकेला के सहायक प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार ने कहा, "यह पेटेंट प्राप्त प्रणाली फेडरेटेड लर्निंग, एज कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त सफाई तथा पूर्वानुमान-आधारित रखरखाव (Predictive Maintenance) को एकीकृत सैंडबॉक्स प्लेटफ़ॉर्म में समाहित करती है। रियल-टाइम एज इंटेलिजेंस, स्वचालित दोष पहचान, आवश्यकता-आधारित चयनात्मक सफाई, जल की कम खपत तथा रखरखाव लागत में कमी जैसी विशेषताएँ इसे अपनी तरह की एक विशिष्ट प्रणाली बनाती हैं।" इस तकनीक का उपयोग बड़े उपयोगिता-स्तरीय सौर ऊर्जा संयंत्रों, फ्लोटिंग सोलर फार्म, रूफटॉप फोटोवोल्टिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक सौर पार्कों, स्मार्ट सिटी ऊर्जा अवसंरचना, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा दूरस्थ ऑफ-ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में किया जा सकता है।"

तकनीक की लागत-प्रभावशीलता पर प्रकाश डालते हुए एनआईटी राउरकेला के प्रोफेसर प्रो. बिभूदत्त साहू ने कहा, "वर्तमान में उपलब्ध बाजार आधारित समाधान उच्च पूंजीगत लागत और सीमित बुद्धिमत्ता से प्रभावित हैं, जबकि हमारी विकसित प्रणाली स्वायत्त संचालन के लिए उन्नत एआई क्षमताओं को एकीकृत करती है। क्षेत्रीय स्तर पर इसका विस्तार होने के बाद यह तकनीक मौजूदा प्रणालियों की तुलना में लगभग 10% लागत पर बेहतर प्रदर्शन और अधिक उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है।"अगले चरण में शोध दल इस नवाचार के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित सेंसर अवसंरचना से एकीकृत हार्डवेयर प्रोटोटाइप विकसित करेगा तथा सिमुलेशन-आधारित अवधारणा प्रमाण से आगे बढ़ते हुए पायलट परियोजनाओं के माध्यम से प्रोटोटाइप का परीक्षण करेगा।

इसके अतिरिक्त, शोध दल सरकारी एजेंसियों और औद्योगिक साझेदारों के साथ सहयोग स्थापित कर इस तकनीक के क्षेत्रीय परीक्षण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में कार्य करने की योजना बना रहा है। नवाचार के अगले चरण में ड्रोन-सहायता प्राप्त निरीक्षण, बहु-एजेंट सहयोगात्मक सफाई तथा ऊर्जा उत्पादन के पूर्वानुमान जैसी उन्नत सुविधाओं को भी एकीकृत किया जाएगा। यह तकनीक भारत सरकार के राष्ट्रीय सौर मिशन तथा नेट ज़ीरो लक्ष्य को समर्थन प्रदान करती है। सौर ऊर्जा अवसंरचना के गोपनीयता-संरक्षित और स्वायत्त रखरखाव को सक्षम बनाकर एनआईटी राउरकेला का यह नवाचार भारत सहित विश्वभर में सौर ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।