शराब ठेके के सामने ओपन बार का नजारा
रायपुर: शराब दुकान के सामने 'ओपन बार' का नजारा, शाम ढलते ही सहम जाते हैं राहगीर; आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
राजधानी रायपुर में शराब दुकानों के आसपास की स्थिति दिन-ब-दिन बेकाबू होती जा रही है। नियमों की अनदेखी और जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते शराब दुकानों के ठीक सामने खुलेआम जाम छलकाए जा रहे हैं। शाम होते ही मुख्य सड़कों पर लगने वाला यह मजमा न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है, बल्कि आम नागरिकों—विशेषकर महिलाओं और परिवारों—के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन चुका है ।
नियम सिर्फ कागजों पर: खुले में शराब पीने और पिलाने पर सख्त पाबंदी के बावजूद दुकानों के पास अवैध रूप से चखना सेंटर और महफिलें सज रही हैं।
राहगीरों की सांसत: बेतरतीब खड़े दोपहिया और चार पहिया वाहनों की वजह से हर शाम लंबा ट्रैफिक जाम लगता है, वहीं नशेड़ियों की बदतमीजी के डर से लोग रास्ते बदलने को मजबूर हैं।
विवादों की वजह: शराब दुकानों के इर्द-गिर्द आए दिन गाली-गलौज, मारपीट और राहजनी की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे आसपास के व्यापारी और स्थानीय रहवासी खौफ के साए में हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों का उल्लंघन दिनदहाड़े और सरेआम हो रहा है, लेकिन न तो आबकारी विभाग का उड़नदस्ता सक्रिय दिखता है और न ही स्थानीय पुलिस का कोई ठोस पहरा नजर आता है। शिकायतों के बाद खानापूर्ति के तौर पर एक-दो दिन कार्रवाई होती है, मगर उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। "शाम 7 बजे के बाद इस रास्ते से परिवार के साथ गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं। दुकानों के सामने ही शराब पी जाती है और तेज आवाज में अपशब्द कहे जाते हैं। प्रशासन सब कुछ देखकर भी अनजान बना हुआ है।"
सरकारी राजस्व की आड़ में आम नागरिकों की सुरक्षा को दांव पर क्यों लगाया जा रहा है?
शराब दुकानों के 100 मीटर के दायरे में लगने वाले अवैध चखना ठेलों पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या गंभीर अपराध के बाद ही जागेगा? प्रशासन को चाहिए कि केवल औपचारिक नोटिस जारी करने के बजाय शाम के वक्त पेट्रोलिंग बढ़ाए, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करे और खुले में शराबखोरी करने वालों के खिलाफ मौके पर ही सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में ल





