तालचर के रानी पार्क को बचाने के लिए एकजुट हुए लोग
अनुराग आचार्य (संवाददाता)
तालचेर - एक तरफ जंगलो की कटाई से धरती का तापमान निरंतर बढ़ रहा है तो दुसरी तरफ बचेखुचे जंगलो को बचाए रखने की वजाए बर्बाद करने में लगे है लोग। ऐसा ही एक मामला अनुगुल जिले के तालचर से सामने आया है। ओडिशा के तालचर में कोयला खाने होने के कारण गर्मियो के मौसम में यहाँ का तापमान अधिक रहता है ऐसे में इस क्षेत्र में एक एक पेड़ किमती है पर राजा-रजवाडों के शासन काल से वन के रूप में संभालकर रखी गई बिरासत को वन की जगह जैविक खाद्ध बनाने के लिए यहाँ अनुगुल से लाई गई मल को फेका जाएगा,और जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा।
तालचर शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक रानीपार्क को तालचर के तत्कालीन राजासाहब ने 614 एकड़ से अधिक भूखण्ड पर तालचर निवासियो की सुविधा के लिए बनवाया था जिसमें कई औषधीय पेड़पौधो समेत कीमती व बहुमुल्य बृक्ष लताओ को लगाया गया था और इसकी सुरक्षा के लिए पार्क के चारो ओर ऊंची दीवार का निर्माण किया गया था। इस पार्क में विभिन्न प्रकार के पशु पक्षियों और वन्यजीवों की कई प्रजातियाँ थीं। तब राजा साहब स्वयं इस जंगल में शिकार का आनंद लिया करते थे। इस पार्क के होने से तालचर में एक वातावरण और प्राकृतिक सौन्दर्य परिवेश की श्रृष्टी करता है। हालाँकि, राजशाही समाप्त होने के बाद, सरकार द्वारा इस भूखण्ड को सीलिंग कर सरकारी भूमि घोषित कर दिया गया। जिसके बाद देखरेख के अभाव में लकड़ी माफियाओ द्वारा कई मूल्यवान पेड़ों को काट लिया गया, वन्यजीवों को मार डाला गया और इस तरह जंगलों को नष्ट कर दिया गया । समय बीतने के साथ, तालचर में कोयला खानों की संख्या और आबादी तेजी से बढ़ी।
वनो का विनाश होने से जल, वायु और वायुमंडल प्रदूषित होती गई और वातावरण में तापमान की वृद्धी होती गई साथ ही पानी की समस्याएँ भी उत्पन्न हो गई । इसलिए इस पार्क को बचाने के लिए कई स्थानीय लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीजूपटनायक ने तालचर आकर उस समय रानी पार्क को मिनी नंदनकानन बनाने का सपना देखा था, लेकिन आज वह सपना साकार होता नजर नही दिन रहा है। इसके लिए, तालचर विकास परिषद ने बारम्बार विभिन्न संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मदद की गुहार लगाई ताकि रानी पार्क में एक हिरण पार्क और एक मिनी नंदनकानन बनाया जा सके।
सरकार के मुताबिक रानीपार्क के जंगल में करोडो़ रुपये के बृक्षारोपण किया गया। इन बृक्षो की सुरक्षा के लिए जिला खनिज कोष से करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से मेघनाद दीवार का निर्माण कार्य आरम्भ किया गया है। लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि जिला प्रशासन रानी पार्क में अनुगुल जिले से मल लाकर जैविक खाद तैयार करने की योजना बना रहा है।इस विषय को लेकर पूरे शहर में जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। रानीपार्क क्षेत्र तालचर शहर के बिचोबीच स्थित है। यदि इस जगह जैविक खाद का उत्पादन किया जाता है तो तालचर वासियो की नाक दुर्गंध से फट पडे़गी। जैसे-जैसे पर्यावरण बिगड़ता जाएगा, स्थानीय निवासियो को कई तरह की बीमारीयो का सामना करना पड़ सकता है। यदि यहाँ जैविक खाद बनाने का निर्णय वापस ना लिया गया तो तालचर के लोग आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।





